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ते न॑: सह॒स्रिणं॑ र॒यिं पव॑न्ता॒मा सु॒वीर्य॑म् । सु॒वा॒ना दे॒वास॒ इन्द॑वः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

te naḥ sahasriṇaṁ rayim pavantām ā suvīryam | suvānā devāsa indavaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ते । नः॒ । स॒ह॒स्रिण॑म् । र॒यिम् । पव॑न्ताम् । आ । सु॒ऽवीर्य॑म् । सु॒वा॒नाः । दे॒वासः॑ । इन्द॑वः ॥ ९.१३.५

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:13» मन्त्र:5 | अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:1» मन्त्र:5 | मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:5


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दवः) परमैश्वर्ययुक्त परमात्मा (देवासः) दिव्य शक्तिवाला (सुवानाः) सबको उत्पन्न करनेवाला (सुवीर्यम्) सुन्दर बल को (आ पवन्ताम्) भली भाँति हमको देय और (ते) वह (सहस्रिणम्) अनन्त प्रकार के (रयिम्) ऐश्वर्य को (नः) हमको देय ॥५॥
भावार्थभाषाः - यहाँ ‘व्यत्ययो बहुलम्’ इस सूत्र से एकवचन के स्थान में बहुवचन हुआ है, इसलिये ईश्वर का ही ग्रहण समझना चाहिये, किसी अन्य का नहीं ॥५॥१॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सुवीर्य रयि

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (ते) = वे सोम (नः) = हमारे लिये (सहस्रिणम्) = सहस्र संख्यावाले (रयिम्) = ऐश्वर्य को तथा (सुवीर्यम्) = उत्तम शक्ति को (आपवन्ताम्) = सर्वथा प्राप्त करायें । रक्षित हुआ हुआ सोम ऐश्वर्य को प्राप्त कराता है, उस ऐश्वर्य को जो कि शक्ति से युक्त है । [२] (सुवानाः) = उत्पन्न होते हुए ये सोम (देवास:) = हमारे जीवन को प्रकाशमय बनाते हैं और (इन्दवः) = ये हमें शक्तिशाली बनानेवाले हैं
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण से सुवीर्य रयि की प्राप्ति होती है। ये सोम हमें प्रकाशमय शक्ति-सम्पन्न जीवनवाला बनाते हैं।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दवः) परमैश्वर्यवान् परमात्मा (देवासः) दिव्यशक्तिः (सुवानाः) सर्वेषामुत्पादकः (सुवीर्यम्) पर्याप्तं पराक्रमं (आ पवन्ताम्) सम्यग् ददातु तथा (ते) सः (सहस्रिणम्) अनेकविधम् (रयिम्) ऐश्वर्यम् (नः) अस्मभ्यं प्रयच्छतु ॥५॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - May those streams of soma, divine showers of beauty and glory, inspiring us, energising us with strength and virility, flow and purify us, and give us a thousand-fold wealth, honour and glory, and high creative potential for further advancement.