पव॑मानमवस्यवो॒ विप्र॑म॒भि प्र गा॑यत । सु॒ष्वा॒णं दे॒ववी॑तये ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
pavamānam avasyavo vipram abhi pra gāyata | suṣvāṇaṁ devavītaye ||
पद पाठ
पव॑मानम् । अ॒व॒स्य॒वः॒ । विप्र॑म् । अ॒भि । प्र । गा॒य॒त॒ । सु॒ष्वा॒णम् । दे॒वऽवी॑तये ॥ ९.१३.२
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:13» मन्त्र:2
| अष्टक:6» अध्याय:8» वर्ग:1» मन्त्र:2
| मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:2
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (अवस्यवः) हे उपदेश द्वारा प्रजा की रक्षा चाहनेवाले विद्वानों ! आप (देववीतये) दिव्य ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिये (सुष्वाणम् पवमानम् विप्रम्) सबको पवित्र करनेवाले पूरण परमात्मा का (अभि प्र गायत) तुम गान करो ॥२॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा उपदेश करते हैं कि हे विद्वानों ! तुम उस पुरुष की उपासना करो, जो सर्वप्रेरक है और सबको पवित्र करनेवाला है और व्यापकरूप से सर्वत्र स्थिर है ॥२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सोम-गुण-गायन
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अवस्यवः) = रक्षण की कामनावाले पुरुषो! (पवमानम्) = जीवन को पवित्र बनानेवाले (विप्रम्) = तुम्हारा विशेषरूप से पूरण करनेवाले (सुष्वाणम्) = इस ऐश्वर्य के कारणभूत सोम [षू ऐश्वर्य] का (अभि प्रगायत) = गायन करो। इसके गुणों का गायन करने से इसके रक्षण की वृत्ति तुम्हारे में उत्पन्न होगी। [२] इसके गुणों का गायन इसलिए करो कि यह उत्पन्न हुआ हुआ देववीतये दिव्य गुणों की प्राप्ति के लिये होता है । सोम के रक्षण से दिव्य गुणों का विकास होता है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-रक्षित हुआ हुआ सोम हमारा रक्षण करता है, यह दिव्य गुणों के विकास के लिये होता है।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (अवस्यवः) हे सदुपदेशेन प्रजा रिरिक्षवो विद्वांसः ! भवन्तः (देववीतये) दिव्यैश्वर्यप्राप्तये (सुष्वाणम्) सर्वेषां प्रेरकम् (पवमानम्, विप्रम्) सर्वेषां पावयितारं पूर्णपुरुषम् (अभि, प्र, गायत) स्तुवन्तु ॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O seekers of energy, power and protection, sing and adore the soma of existence, lord creator and energiser, pure and purifying, omniscient giver of knowledge and wisdom, for the sake of divine excellence and felicity in life.
