स न॑: पवस्व॒ शं गवे॒ शं जना॑य॒ शमर्व॑ते । शं रा॑ज॒न्नोष॑धीभ्यः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
sa naḥ pavasva śaṁ gave śaṁ janāya śam arvate | śaṁ rājann oṣadhībhyaḥ ||
पद पाठ
सः । नः॒ । प॒व॒स्व॒ । शम् । गवे॑ । शम् । जना॑य । शम् । अर्व॑ते । शम् । रा॒ज॒न् । ओष॑धीभ्यः ॥ ९.११.३
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:11» मन्त्र:3
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:36» मन्त्र:3
| मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:3
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - हे (राजन् सः) पूर्वोक्त दीप्तिमन् परमात्मन् ! (नः) हमारी (गवे) इन्द्रियों के लिये (शम् पवस्व) कल्याणकारी हो (शम् अर्वते जनाय) कर्मकाण्डी मनुष्यों के लिये कल्याणकारी हो (शम् ओषधीभ्यः) और हमारी ओषधियों के लिये कल्याणकारी हो ॥३॥
भावार्थभाषाः - यहाँ ओषधि केवल उपलक्षण है, वस्तुतः प्रत्येक संसारवर्ग के लिये इस मन्त्र में कल्याण की प्रार्थना की गई है ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'गौ-जन- अर्वा '
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे सोम ! (सः) = वह तू (नः पवस्व) = हमारे जीवनों को पवित्र करनेवाला हो । (गवे शम्) = हमारी ज्ञानेन्द्रियों के लिये तू शान्ति को करनेवाला हो । (जनाय शम्) = हमारी शक्तियों के प्रादुर्भाव के लिये [ जन् प्रादुर्भावे] होता हुआ तू शान्ति को देनेवाला हो । (अर्वते शम्) = हमारे कर्मेन्द्रियरूप अश्वों के लिये तू शान्ति को देनेवाला हो। [२] हे (राजन्) = हमारे जीवनों को दीप्त करनेवाले सोम! तू (ओषधीभ्यः) = [पंचमी] ओषधियों के सेवन से उत्पन्न हुआ हुआ (शम्) = शान्ति को देनेवाला हो । ओषधियाँ सामान्यतः 'सोम्य' भोजन हैं, मांसादि आग्नेय हैं। ओषधि भोजन से उत्पन्न सोम का शरीर में रक्षण सुगम हैं ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण से ज्ञानेन्द्रियाँ व कर्मेन्द्रियाँ स्वस्थ रहती हैं। शक्तियों का विकास भी इसी सोमरक्षण पर निर्भर करता है ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (राजन् सः) हे पूर्वोक्तदीप्तिमन् परमात्मन् ! (नः) अस्माकम् (गवे) इन्द्रियेभ्यः (शम् पवस्व) कल्याणं क्षर (शम् अर्वते जनाय) कर्मकाण्डिने च कल्याणं प्रयच्छ (शम् ओषधीभ्यः) ओषधिभ्यश्च कल्याणकर्त्ता भव ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, self-refulgent light, life of life, flow free and bring us fertility for the cow, agility for the horse and maturity for the herbs and trees, undisturbed efficiency for the senses, peace and tranquillity for the mind and soul, and peace, prosperity and joy for the people.
