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इन्दु॑: पुना॒नः प्र॒जामु॑रा॒णः कर॒द्विश्वा॑नि॒ द्रवि॑णानि नः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

induḥ punānaḥ prajām urāṇaḥ karad viśvāni draviṇāni naḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इन्दुः॑ । पु॒ना॒नः । प्र॒ऽजाम् । उ॒रा॒णः । क॒र॒त् । विश्वा॑नि । द्रवि॑णानि । नः॒ ॥ ९.१०९.९

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ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:109» मन्त्र:9 | अष्टक:7» अध्याय:5» वर्ग:20» मन्त्र:9 | मण्डल:9» अनुवाक:7» मन्त्र:9


आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दुः) सर्वप्रकाशक (पुनानः) सबको पवित्र करनेवाला (प्रजां, उराणः) प्रजाओं के ऐश्वर्य्य को विशाल करता हुआ परमात्मा (विश्वानि, द्रविणानि) सम्पूर्ण ऐश्वर्य्य (नः) हमको (करत्) प्रदान करे ॥९॥
भावार्थभाषाः - जो परमात्मा सम्पूर्ण प्रजाओं के ऐश्वर्य्य को बढ़ाता और जो स्वतःप्रकाश तथा स्वयंभू है, वही हमारा उपास्यदेव है, उसी की उपासना करता हुआ पुरुष आनन्दलाभ करता है, अन्यथा नहीं ॥९॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

पुनानः, प्रजाम् उराण:

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दुः) = हमें शक्तिशाली बनानेवाला सोम (पुनानः) = पवित्र करता हुआ तथा (प्रजाम्) = सब शक्तियों के प्रादुर्भाव को (उराण:) = [उरु कुर्वाणः] खूब करता हुआ है। सुरक्षित सोम से जीवन में पवित्रता व शक्तियों का विस्तार उत्पन्न होता है। यह सोम (नः) = हमारे लिये (विश्वानि) = सब (द्रविणानि) = धनों को (करत्) = करे । अन्नमय कोश को यह तेजोरूप ऐश्वर्य से भरे, प्राणमय को वीर्य से, मनोमय को ओज व बल से, विज्ञानमय को ज्ञान से [मन्युः मन अववोधने] तथा आनन्दमय को सहस् से परिपूर्ण करे ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोम 'पवित्रता - शक्तियों के विस्तार तथा सब कोशों के ऐश्वर्य' को प्राप्त कराये ।

आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दुः) सर्वप्रकाशकः (पुनानः) पावयिता (प्रजाम्, उराणः) प्रजैश्वर्यं वर्धयन् (विश्वानि, द्रविणानि) अखिलैश्वर्य्याणि (नः) अस्मभ्यं (करत्) ददातु ॥९॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Soma, generous, brilliant and blissful spirit of divinity, pure and purifying, inspirer and energiser of people, may, we pray, generate all wealth and honours of the world for us.