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पव॑स्व सोम द्यु॒म्नी सु॑धा॒रो म॒हामवी॑ना॒मनु॑ पू॒र्व्यः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

pavasva soma dyumnī sudhāro mahām avīnām anu pūrvyaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

पव॑स्व । सो॒म॒ । द्यु॒म्नी । सु॒ऽधा॒रः । म॒हाम् । अवी॑नाम् । अनु॑ । पू॒र्व्यः ॥ ९.१०९.७

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:109» मन्त्र:7 | अष्टक:7» अध्याय:5» वर्ग:20» मन्त्र:7 | मण्डल:9» अनुवाक:7» मन्त्र:7


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे सोमगुणसम्पन्न तथा सर्वोत्पादक परमात्मन् ! आप (द्युम्नी) यशःस्वरूप (सुधारः) अमृतस्वरूप, तथा (महाम्, अवीनाम्) बड़े-बड़े रक्षकों में (अनु, पूर्व्यः) सबसे मुख्य रक्षक होने से आप (पवस्व) हमको पवित्र करें ॥७॥
भावार्थभाषाः - सर्वोपरि परमात्मा, जिसका यश महान्=सबसे बड़ा है, वही हमारा रक्षक और वही एकमात्र उपास्य देव है ॥७॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

द्युम्नी, सुधार:

पदार्थान्वयभाषाः - हे (सोम) = वीर्य ! तू (पवस्व) = हमें प्राप्त हो । (द्युम्नी) = तू ज्योतिर्मय है, हमारे मस्तिष्क को ज्ञानज्योति से भरनेवाला है। (सुधारः) = बहुत अच्छी प्रकार हमारा धारण करनेवाला है। (महाम्) = प्रभु पूजन की वृत्तिवालों का [मह पूजायाम्] तथा प्रभु पूजन द्वारा (अवीनाम् अनु) = रक्षकों का, सोम का रक्षण करने वालों का अनुकूलता से (पूर्व्यः) = पालन व पूरण करनेवाला है। शरीर को तू रोगाक्रान्त नहीं होने देता और मन में आसुरभावों को नहीं आने देता।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु पूजक इस सोम का रक्षण करते हैं। यह उन्हें ज्योति व धारणशक्ति प्राप्त कराता हुआ उनका पालन व पूरण करता है ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सोम) हे परमात्मन् ! (द्युम्नी) यशःस्वरूपो भवान् (सुधारः) अमृतधारारूपः (महाम्, अवीनाम्) महतां रक्षकानां मध्ये (अनु, पूर्व्यः) मुख्योऽस्ति, इत्थम्भूतो भवान् (पवस्व) मां पुनातु  ॥७॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O Soma, you are the glory and the grandeur, holy stream and shower, the first and eternal of the greatest of the great, pray flow forth in presence, radiate and purify as ever before.