पव॑स्व दे॒ववी॑तय॒ इन्दो॒ धारा॑भि॒रोज॑सा । आ क॒लशं॒ मधु॑मान्त्सोम नः सदः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
pavasva devavītaya indo dhārābhir ojasā | ā kalaśam madhumān soma naḥ sadaḥ ||
पद पाठ
पव॑स्व । दे॒वऽवी॑तये । इन्दो॒ इति॑ । धारा॑भिः । ओज॑सा । आ । क॒लश॑म् । मधु॑ऽमान् । सो॒म॒ । नः॒ । स॒दः॒ ॥ ९.१०६.७
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:106» मन्त्र:7
| अष्टक:7» अध्याय:5» वर्ग:10» मन्त्र:2
| मण्डल:9» अनुवाक:7» मन्त्र:7
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे प्रकाशस्वरूप परमात्मन् ! (देववीतये) देवमार्ग की प्राप्ति के लिये (धाराभिः) आनन्द की वृष्टि से और (ओजसा) अपने विज्ञानयुक्त बल से (पवस्व) हमको पवित्र करें और (सोम) हे परमात्मन् ! (मधुमान्) आनन्दमय आप (नः, कलशं) हमारे अन्तःकरण में (आसदः) आकर विराजमान हों ॥७॥
भावार्थभाषाः - ब्रह्मानन्द जो सब आनन्दों से बढ़कर आनन्द है, जिसको उपनिषत्कारों ने “रसो वै सः रसं ह्येवायं लब्ध्वा आनन्दी भवति” इत्यादि वाक्यों में वर्णन किया है, वह आनन्दरूप परमात्मा अपने भक्तों को अवश्यमेव अपने ब्रह्मानन्द से आनन्दित करता है ॥७॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
देववीतये
पदार्थान्वयभाषाः - हे (इन्दो) = सोम ! तू (ओजसा) = ओजस्विता के द्वारा (धाराभिः) = अपनी धारणशक्तियों के साथ (देववीतये) = उस महान् देव प्रभु की प्राप्ति के लिये (पवस्व) = हमें प्राप्त हो । सोम हमें ओजस्वी बनाकर प्रभु प्राप्ति का पात्र बनाता है 'नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः' । हे सोम ! तू (मधुमान्) = प्रशस्त माधुर्य वाला होता हुआ (नः) = हमारे (कलशं) = इस शरीर रूप कलश में (आसदः) = आसीन हो। इस शरीर की सब कलाओं का रक्षण इस सोम ने ही तो करना है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोम हमें ओजस्वी बनाकर प्रभु को प्राप्त कराये। यह हमें मधुर बनाता हुआ सब कलाओं से युक्त जीवन वाला बनाये ।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्दो) हे प्रकाशस्वरूप परमात्मन् ! (देववीतये) देवमार्गप्राप्तये (धाराभिः) आनन्दवर्षैः (ओजसा) स्वविज्ञानयुक्तबलेन च (पवस्व) पुनातु मां (सोम) हे परमात्मन् ! (मधुमान्) आनन्दमयो भवान् (नः, कलशं) मदन्तःकरणं (आसदः) प्राप्नोतु ॥७॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O Soma of divine light and peace, harbinger of honeyed joy, flow in streams with power and lustre for our attainment of the path of divinity and abide in our heart core of the soul.
