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सु॒तासो॒ मधु॑मत्तमा॒: सोमा॒ इन्द्रा॑य म॒न्दिन॑: । प॒वित्र॑वन्तो अक्षरन्दे॒वान्ग॑च्छन्तु वो॒ मदा॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sutāso madhumattamāḥ somā indrāya mandinaḥ | pavitravanto akṣaran devān gacchantu vo madāḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सु॒तासः॑ । मधु॑मत्ऽतमाः । सोमाः॑ । इन्द्रा॑य । म॒न्दिनः॑ । प॒वित्र॑ऽवन्तः । अ॒क्ष॒र॒न् । दे॒वान् । ग॒च्छ॒न्तु॒ । वः॒ । मदाः॑ ॥ ९.१०१.४

ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:101» मन्त्र:4 | अष्टक:7» अध्याय:5» वर्ग:1» मन्त्र:4 | मण्डल:9» अनुवाक:6» मन्त्र:4


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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सुतासः) आविर्भाव को प्राप्त हुए (मधुमत्तमाः) अत्यन्त आनन्दमय (सोमाः) परमात्मा के सौम्य स्वभाव (मन्दिनः) जो अह्लादक हैं, वे (इन्द्राय) कर्मयोगी के लिये प्राप्त हों और (वः) तुम जो (देवान्) दिव्यगुणयुक्त विद्वान् हो, उनको (मदाः) वह आह्लादक गुण (पवित्रवन्तः) पवित्रतावाले (अक्षरन्) आनन्द की वृष्टि करते हुए (गच्छन्तु) प्राप्त हों ॥४॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा के अपहतपाप्मादि धर्मों का धारण करना इस मन्त्र में वर्णन किया गया है अर्थात् परमात्मा के सौम्यस्वभावादिकों को जव जीव धारण कर लेता है, तो वह शुद्ध होकर ज्ञानयोगी व कर्मयोगी बन सकता है, अन्यथा नहीं ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

मधुमत्तमा:- मन्दिनः

पदार्थान्वयभाषाः - (सुतासः) = उत्पन्न हुए हुए (सोमा:) = सोम (मधुमत्तमा:) = अत्यन्त माधुर्य को लिये हुए हैं, सुरक्षित होने पर ये जीवन को मधुर बनाते हैं । (इन्द्राय) = जितेन्द्रिय पुरुष के लिये ये (मन्दिनः) = हर्ष को देनेवाले हैं। (पवित्रवन्तः) = पवित्रता को करनेवाले ये सोम (अक्षरत्) = शरीर के अंग-प्रत्यंग में संचरित होते हैं । हे सोमकणो ! (वः मदा:) = तुम्हारे उल्लास (देवान् गच्छन्तु) = इन देववृत्ति वाले पुरुषों को प्राप्त हों । देववृत्ति वाले पुरुष ही सोम का रक्षण कर पाते हैं। वे ही सोम जनित उल्लास का अनुभव करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सुरक्षित सोमकण 'माधुर्य, हर्ष, पवित्रता व उल्लास' को प्राप्त कराते हैं ।
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आर्यमुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (सुतासः) आविर्भूताः (मन्दिनः) आह्लादकाः (मधुमत्तमाः) आनन्दमयाः (सोमाः) परमात्मसौम्यस्वभावाः (इन्द्राय) कर्मयोगिनं प्राप्नुवन्तु (वः, देवान्) युष्मान् दिव्यगुणान् विदुषः (पवित्रवन्तः) पवित्रतायुक्ताः (मदाः) आह्लादकगुणाः (अक्षरन्) आनन्दवृष्ट्या सह (गच्छन्तु) प्राप्नुवन्तु ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Filtered, felt and cleansed, honey sweet soma streams, pure and exhilarating, flow for Indra, the soul, and may the exhilarations reach you, noble favourites of divinity.