अप॒ द्वारा॑ मती॒नां प्र॒त्ना ऋ॑ण्वन्ति का॒रव॑: । वृष्णो॒ हर॑स आ॒यव॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
apa dvārā matīnām pratnā ṛṇvanti kāravaḥ | vṛṣṇo harasa āyavaḥ ||
पद पाठ
अप॑ । द्वारा॑ । म॒ती॒नाम् । प्र॒त्नाः । ऋ॒ण्व॒न्ति॒ । का॒रवः॑ । वृष्णः॑ । हर॑से । आ॒यवः॑ ॥ ९.१०.६
ऋग्वेद » मण्डल:9» सूक्त:10» मन्त्र:6
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:35» मन्त्र:1
| मण्डल:9» अनुवाक:1» मन्त्र:6
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (वृष्णः) सब कामनाओं के दाता परमात्मा की (हरसे) पाप की निवृत्ति के लिये उपासना करनेवाले (आयवः) मनुष्य (कारवः) जो कर्मयोगी हैं (प्रत्नाः) जो अभ्यास में परिपक्व हैं, वे (मतीनाम्) बुद्धि के (अप, द्वारा) जो कुत्सित मार्ग हैं, उनको (ऋण्वन्ति) मार्जन कर देते हैं ॥६॥
भावार्थभाषाः - जो कर्मयोगी लोग कर्मयोग में तत्पर हैं और ईश्वर की उपासना में प्रतिदिन रत रहते हैं, वे अपनी बुद्धि को कुमार्ग की ओर कदापि नहीं जाने देते, तात्पर्य यह है कि कर्मयोगियों में अभ्यास की दृढ़ता के प्रभाव से ऐसा सामर्थ्य उत्पन्न हो जाता है कि उनकी बुद्धि सदैव सन्मार्ग की ओर ही जाती है, अन्यत्र नहीं ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अप ऋण्वन्ति
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (मतीनां कारवः) = मननपूर्वक की गई स्तुतियों के करनेवाले, (प्रत्नाः) = पुरातन सभ्यता का अंगीकार करनेवाले, जिन पर नयी दुनियाँ का रंग नहीं चढ़ गया, ऐसे लोग (द्वारा) = इन्द्रिय द्वारों को (अपऋण्वन्ति) = विषय-वासनाओं से पृथक् करते हैं। [२] ये इन्द्रिय द्वारों के विषयों से अलग करनेवाले लोग ही (वृष्णः) = इस शक्ति का सेचन करनेवाले सोम के (हरस:) = आहर्ता होते हैं और (आयवः) = [एति इति] गतिशील होते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण ही हमें सदा गतिशील बनाता है।
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आर्यमुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (वृष्णः) सर्वकामप्रदातुः परमात्मनः (हरसे) पापनाशाय (आयवः) उपासका मनुष्याः (कारवः) कर्मयोगिनः (प्रत्नाः) दृढाभ्यासाः सन्तः (मतीनाम्) बुद्धीनां (अप, द्वारा) कुत्सितमार्गान् (ऋण्वन्ति) शोधयन्ति ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Veteran scholars and artists, blest with the flames and showers of the light and generosity of the omnificent lord of soma, open wide the doors of divine knowledge and will for all humanity over the world.
