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यु॒ञ्जन्ति॒ हरी॑ इषि॒रस्य॒ गाथ॑यो॒रौ रथ॑ उ॒रुयु॑गे । इ॒न्द्र॒वाहा॑ वचो॒युजा॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yuñjanti harī iṣirasya gāthayorau ratha uruyuge | indravāhā vacoyujā ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यु॒ञ्जन्ति॑ । हरी॒ इति॑ । इ॒षि॒रस्य॑ । गाथ॑या । उ॒रौ । रथे॑ । उ॒रुऽयु॑गे । इ॒न्द्र॒ऽवाहा॑ । व॒चः॒ऽयुजा॑ ॥ ८.९८.९

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:98» मन्त्र:9 | अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:2» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:9


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

इन्द्रवाहा, वचोयुजा

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (इषिरस्य) = उस सर्वप्रेरक, सबको गति देनेवाले प्रभु की (गाथया) = गुणगाथा के साथ (हरी) = इन्द्रियाश्वों को (उरौ रथे) = इस विशाल शरीर रथ में (युञ्जन्ति) = जोतते हैं। उस रथ में इनको जोतते हैं जो (उरुयुगे) = विशाल युगवाला है, मन ही युग है, यह आत्मा व इन्द्रियों को जोड़नेवाला है । [२] ये (इन्द्रियाश्ववाहा) = जितेन्द्रिय पुरुष का लक्ष्य की ओर वहन करनेवाले हैं, इस जितेन्द्रिय पुरुष को ये प्रभु के समीप प्राप्त कराते हैं। (वचोयुजा) = ये इन्द्रियाश्व वेदवाणी के अनुसार कार्यों में प्रवृत्त होनेवाले हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रेरक प्रभु का गुणगान करनेवाला व्यक्ति इन्द्रियाश्वों को शरीर रथ में वेदवाणी के निर्देश के अनुसार युक्त कर प्रभुरूप लक्ष्य की ओर बढ़ता है।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Two motive forces like chariot horses, controlled by word, carry Indra, the soul, in the wide yoked spacious body-chariot by the power of the adorations of the universal mover, Indra, cosmic energy.