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अधा॒ ही॑न्द्र गिर्वण॒ उप॑ त्वा॒ कामा॑न्म॒हः स॑सृ॒ज्महे॑ । उ॒देव॒ यन्त॑ उ॒दभि॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

adhā hīndra girvaṇa upa tvā kāmān mahaḥ sasṛjmahe | udeva yanta udabhiḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अध॑ । हि । इ॒न्द्र॒ । गि॒र्व॒णः॒ । उप॑ । त्वा॒ । कामा॑न् । म॒हः । स॒सृ॒ज्महे॑ । उ॒त् । एव॑ । यन्तः॑ । उ॒दऽभिः॑ ॥ ८.९८.७

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:98» मन्त्र:7 | अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:2» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:7


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'महः कामान्'[महान् कामनायें ]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (गिर्वणः) = ज्ञान की वाणियों द्वारा उपासनीय (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (अधा हि) = अब निश्चय से (त्वा उप) = आपके समीप ही (महः कामान्) = इन महान् कामनाओं को (ससृज्महे) = अपने में उत्पन्न कर पाते हैं। प्रभु की उपासना से उस महान् प्रभु का सम्पर्क हमारे में महान् ही कामनाओं को जन्म देता है। [२] (इव) = जैसे (उदा यन्तः) = पानी में से जाते हुए पुरुष (उदभिः) = जलों से अपने को संसृष्ट करनेवाले होते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-नदी से जानेवाले पुरुष जैसे जलों से संसृष्ट होते हैं, इसी प्रकार महान् प्रभु के सम्पर्कवाले पुरुष महान कामनाओं से संसृष्ट हो पाते हैं। इनके अन्दर तुच्छ कामनायें उत्पन्न ही नहीं होती।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - And O lord lover of song and celebration, Indra, we send up vaulting voices of adoration and prayer to you like wave on waves of the flood rolling upon the sea.