एन्द्र॑ नो गधि प्रि॒यः स॑त्रा॒जिदगो॑ह्यः । गि॒रिर्न वि॒श्वत॑स्पृ॒थुः पति॑र्दि॒वः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
endra no gadhi priyaḥ satrājid agohyaḥ | girir na viśvatas pṛthuḥ patir divaḥ ||
पद पाठ
आ । इ॒न्द्र॒ । नः॒ । ग॒धि॒ । प्रि॒यः । स॒त्रा॒ऽजित् । अगो॑ह्यः । गि॒रिः । न । वि॒श्वतः॑ । पृ॒थुः । पतिः॑ । दि॒वः ॥ ८.९८.४
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:98» मन्त्र:4
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:1» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:4
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सत्राजित्
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! आप (नः) = हमें (आगधि) = प्राप्त होइये। (प्रियः) = आप प्रीति व आनन्द के जनक हैं, (सत्राजित्) = सदा विजय प्राप्त करानेवाले हैं। (अगोह्यः) = किसी से भी संवृत नहीं किये जाने योग्य हैं। सारे ब्रह्माण्ड को आपने अपने में आवृत किया हुआ है। 'अगोह्यः' का भाव यह भी है कि प्रभु की महिमा कण-कण में दृष्टिगोचर होती है, सो प्रभु का प्रकाश तो सर्वत्र है। [२] आप (गिरिः न) = उपदेष्टा के समान हैं। हृदयस्थरूपेण सदा सत्कर्मों की प्रेरणा दे रहे हैं। (विश्वतः पृथुः) = सब दृष्टिकोणों से विशाल हैं। आपका ज्ञान, बल व ऐश्वर्य सब अनन्त है। आप (दिवः पतिः) = प्रकाश के, ज्ञान के स्वामी हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु हमें विजय प्राप्त कराते हैं। ज्ञानोपदेश द्वारा वे हमारा कल्याण करते हैं।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Indra, come, take us over as your own. Dear and giver of fulfilment you are, all dominant by nature, character and action, inconceivably open and bright, expansive and unbounded all round like a cloud of vapour, lord and master of the light of heaven.
