त्वां शु॑ष्मिन्पुरुहूत वाज॒यन्त॒मुप॑ ब्रुवे शतक्रतो । स नो॑ रास्व सु॒वीर्य॑म् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
tvāṁ śuṣmin puruhūta vājayantam upa bruve śatakrato | sa no rāsva suvīryam ||
पद पाठ
त्वाम् । शु॒ष्मि॒न् । पु॒रु॒ऽहू॒त॒ । वा॒ज॒यन्त॑म् । उप॑ । ब्रु॒वे॒ । श॒त॒क्र॒तो॒ इति॑ शतऽक्रतो । सः । नः॒ । रा॒स्व॒ । सु॒ऽवीर्य॑म् ॥ ८.९८.१२
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:98» मन्त्र:12
| अष्टक:6» अध्याय:7» वर्ग:2» मन्त्र:6
| मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:12
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सुवीर्यम्
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (शुष्मिन्) = शत्रुओं के शोषक बल से सम्पन्न ! (पुरुहूत) = बहुतों के पुकारे जानेवाले (शतक्रतो) = अनन्त प्रज्ञान व शक्ति से सम्पन्न प्रभो ! (वाजयन्तम्) = हमारे साथ सम्पर्कवाले (त्वाम् उपब्रुवे) = आपको ही मैं पुकारता हूँ। [२] हे प्रभो ! (सः) = वे आप (नः) = हमारे लिये (सुवीर्यं रास्व) = उत्तम शक्ति को दीजिये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सर्वशक्तिमान् प्रभु उपासक के साथ भी शक्ति को जोड़ते हैं। हमें भी प्रभु सुवीर्य को प्राप्त करायें। अगले सूक्त में भी 'नृमेध' ही 'इन्द्र' का स्तवन कर रहा है-
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O lord of cosmic energy universally invoked, hero of infinite acts of kindness and creation, giver of sustenance and victory, we pray in silent sincerity of conscience, bring us and bless us with noble strength and vitality of body and mind and creativity of vision and imagination.
