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पिबा॒ सोमं॒ मदा॑य॒ कमिन्द्र॑ श्ये॒नाभृ॑तं सु॒तम् । त्वं हि शश्व॑तीनां॒ पती॒ राजा॑ वि॒शामसि॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

pibā somam madāya kam indra śyenābhṛtaṁ sutam | tvaṁ hi śaśvatīnām patī rājā viśām asi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

पिब॑ । सोम॑म् । मदा॑य । कम् । इन्द्र॑ । श्ये॒नऽआ॑भृतम् । सु॒तम् । त्वम् । हि । शश्व॑तीनाम् । पतिः॑ । राजा॑ । वि॒शाम् । असि॑ ॥ ८.९५.३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:95» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:30» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:3


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'पति व राजा' प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (सोमं पिब) = सोम का हमारे शरीर में ही आप रक्षण करिये। उस सोम का जो (कम्) = सुख को देनेवाला है। श्(येनाभृतम्) = [ श्यैङ् गतौ ] गतिशील पुरुष के द्वारा धारण किया जाता है। (सुतम्) = शरीर में उत्पादित इस सोम को आप ही रक्षित करिये। रक्षित हुआ हुआ यह सोम (मदाय) = जीवन में उल्लास के लिये होता है। [२] हे प्रभो ! (त्वं हि) = आप ही (शश्वतीनां विशाम्) = इन सनातन काल से आ रही अथवा गतिशील प्रजाओं के (पतिः) = रक्षक व (राजा) = शासक असि हैं। आप ही सब प्रजाओं के जीवनों को कर्मानुसार नियन्त्रित करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हे प्रभो आप ही रक्षक व शासक हैं। आप हमारे जीवनों में सोम का रक्षण करते हुए उल्लास को प्राप्त करानेवाले हों।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, enlightened spirit of the universe, enjoy the soothing and illuminating soma of joyous knowledge distilled from life and living literature by dynamic and adorable sages of enlightenment. You are the master, protector, sustainer and ruler of all the universal and eternal generations of the people.