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उ॒तो न्व॑स्य॒ जोष॒माँ इन्द्र॑: सु॒तस्य॒ गोम॑तः । प्रा॒तर्होते॑व मत्सति ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

uto nv asya joṣam ām̐ indraḥ sutasya gomataḥ | prātar hoteva matsati ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

उ॒तो इति॑ । नु । अ॒स्य॒ । जोष॑म् । आ । इन्द्रः॑ । सु॒तस्य॑ । गोऽम॑तः । प्रा॒तः । होता॑ऽइव । म॒त्स॒ति॒ ॥ ८.९४.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:94» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:28» मन्त्र:6 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:6


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

प्रातः होता इव

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (उत) = और (उ) = निश्चय से (नु) = अब (इन्द्रः) = एक जितेन्द्रिय पुरुष (अस्य) = इस (गोमतः) = प्रशस्त ज्ञान की वाणियोंवाले (सुतस्य) = सोम के (जोषम्) = प्रीतिपूर्वक सेवन के अनुपात में ही (आमत्सति) = इस प्रकार आनन्दित होता है, (इव) = जैसे (प्रातः होता) = प्रातःकाल होता आनन्द का अनुभव करता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-सोम का रक्षण हमारे जीवन को इस प्रकार आनन्दमय बनाता है जैसे प्रात:काल अग्निहोत्र करनेवाला आनन्दित होता है।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - And surely the delight and exhilaration of this soma, Indra, the soul, inspirited with the power of brilliance and awareness, like a yajaka at dawn, experiences, and celebrates the ecstasy in dance and song.