यस्या॑ दे॒वा उ॒पस्थे॑ व्र॒ता विश्वे॑ धा॒रय॑न्ते । सूर्या॒मासा॑ दृ॒शे कम् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
yasyā devā upasthe vratā viśve dhārayante | sūryāmāsā dṛśe kam ||
पद पाठ
यस्याः॑ । दे॒वाः । उ॒पऽस्थे॑ । व्र॒ता । विश्वे॑ । धा॒रय॑न्ते । सूर्या॒मासा॑ । दृ॒शे । कम् ॥ ८.९४.२
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:94» मन्त्र:2
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:28» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:2
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
वेदमाता की गोद में
पदार्थान्वयभाषाः - [१] गत मन्त्र में वेदवाणी को माता कहा गया है। यह वह माता है (यस्याः) = जिसके (उपस्थे) = गोद में स्थित हुए हुए (विश्वे देवाः) = सब देववृत्ति के पुरुष (व्रता धारयन्ते) = व्रतों का धारण करते हैं। वस्तुतः इस वेदवाणी का स्वाध्याय ही उन्हें देववृत्ति का व व्रतमय जीवनवाला बनाता है। [२] इस माता की गोद में स्थित होनेवाले ये देव (सूर्यामासा दृशे) = सूर्य व चन्द्रमा को देखने के लिये होते हैं। अर्थात् सूर्योदय के साथ ही ये अपने कार्यों में प्रवृत्त हो जाते हैं और सूर्यास्त ही इनकी कर्म-निवृत्ति का समय होता है। सूर्य व चन्द्र ही इनकी घड़ी होते हैं। इस प्रकार स्वाभाविक जीवन को बिताते हुए ये (कम्) = सुखमय जीवनवाले होते हैं। सूर्य-चन्द्रमा को
भावार्थभाषाः - भावार्थ-वेदमाता की गोद में स्थित हुए हुए हम व्रतमय जीवन बितायें, ही अपनी घड़ी बनाकर नियमित जीवन बिताते हुए हम सुखी जीवनवाले हों।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - She in whose lap the Vishvedevas, divinities of humanity and nature, hold, maintain and observe their laws of existence, and the sun and moon wear their beauty and refulgence so that we may see and appreciate the glory of divine existence:
