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त्यान्नु पू॒तद॑क्षसो दि॒वो वो॑ मरुतो हुवे । अ॒स्य सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tyān nu pūtadakṣaso divo vo maruto huve | asya somasya pītaye ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्यान् । नु । पू॒तऽद॑क्षसः । दि॒वः । वः॒ । म॒रु॒तः॒ । हु॒वे॒ । अ॒स्य । सोम॑स्य । पी॒तये॑ ॥ ८.९४.१०

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:94» मन्त्र:10 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:29» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:10


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

पूतदक्षसः- दिवः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] मैं (त्यान्) = उन (मरुतः) = प्राणों को (नु) = अब (हुवे) = पुकारता हूँ जो (वः) = तुम्हारे (पूतदक्षसाः) = बल को पवित्र करनेवाले हैं और (दिवः) = ज्ञान की दीप्ति को देनेवाले हैं। [२] इन मरुतों को मैं (अस्य) = इस (सोमस्य) = सोम के (पीतये) = पान व रक्षण के लिये पुकारता हूँ। सोमरक्षण द्वारा ही ये मरुत् बल व ज्ञान का वर्धन करनेवाले होते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणसाधना से सोमरक्षण द्वारा ज्ञान तथा बल का वर्धन होता है।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Those, O Maruts, heroes of power and purity, I call from your regions of light to come and to enjoy, protect and promote this delight and beauty of the world of existence.