गौर्ध॑यति म॒रुतां॑ श्रव॒स्युर्मा॒ता म॒घोना॑म् । यु॒क्ता वह्नी॒ रथा॑नाम् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
gaur dhayati marutāṁ śravasyur mātā maghonām | yuktā vahnī rathānām ||
पद पाठ
गौः । ध॒य॒ति॒ । म॒रुता॑म् । श्र॒व॒स्युः । म॒ता । म॒घोना॑म् । यु॒क्ता । वह्निः॑ । रथा॑नाम् ॥ ८.९४.१
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:94» मन्त्र:1
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:28» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:10» मन्त्र:1
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
गौ: [वेदवाणी]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] यहाँ वेदवाणी 'गौ' शब्द से कही गयी है। यह सब पदार्थों का ज्ञान देती है [अर्थान् गमयति] यह (गौः) = वेदवाणी (मरुताम्) = [मितराविणां, महद् द्रवतां वा ] कम बोलनेवाले, खूब गतिशील व्यक्तियों के (श्रवस्युः) = ज्ञान की कामनावाली होती है। इन मरुतों को यह खूब ज्ञानी बनाती है। यह (मघोनाम्) = यज्ञशील पुरुषों की (माता) = निर्मात्री है [मघ = मख]। यह (धयति) = शरीर में सोम का पान करती है। स्वाध्याय से वासनाओं का निराकरण होकर सोम का रक्षण होता ही है। (युक्ता) = जब इस वेदवाणी का हम अपने साथ योग करते हैं, तो युक्त हुई हुई यह (रथानाम्) = इन शरीर रथों का (वह्निः) = लक्ष्य - स्थान की ओर वहन करनेवाली है। यह शरीर रथों को उन्नतिपथ पर ले चलती हुई हमें लक्ष्य स्थान पर पहुँचाती है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-वेदमाता हमें मितरावी = खूब क्रियाशील व ज्ञानी बनाती है। यह हमें यज्ञशील बनाती हुई वासनाओं से बचाकर सोमरक्षण के योग्य बनाती है। यह हमें लक्ष्य - स्थान की ओर ले चलती है।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - The cow, the earth, nature herself, mother of magnanimous Maruts, mighty men, is committed to provide sustenance and honourable existence for them and, joined with them in piety, bearing lovely gifts for them, provides the food of life and love as a mother suckles her children.
