357 बार पढ़ा गया
इन्द्र॒: स दाम॑ने कृ॒त ओजि॑ष्ठ॒: स मदे॑ हि॒तः । द्यु॒म्नी श्लो॒की स सो॒म्यः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
indraḥ sa dāmane kṛta ojiṣṭhaḥ sa made hitaḥ | dyumnī ślokī sa somyaḥ ||
पद पाठ
इन्द्रः॑ । सः । दाम॑ने । कृ॒तः । ओजि॑ष्ठः॑ । सः । मदे॑ । हि॒तः । द्यु॒म्नी । श्लो॒की । सः । सो॒म्यः ॥ ८.९३.८
357 बार पढ़ा गया
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:93» मन्त्र:8
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:22» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:8
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'इन्द्र' का लक्षण
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (इन्द्रः सः) = इन्द्रियों का अधिष्ठाता जीव वह है जो (दामने कृतः) = इन्द्रियों के संयम [दाम=बन्धन] के लिये किया गया है। (ओजिष्ठः) = ओजस्वितम है। इन्द्रियों का संयम ही तो उसे ओजस्वी बनाता है। (सः) = वह (इन्द्र मदे) = सोमपान जनित उल्लास के होने पर शक्ति का रक्षण होने पर (हितः) = सब का हित करनेवाला होता है। [२] (द्युम्नी) = यह ज्ञान की ज्योतिवाला होता है। (श्लोकी) = यशस्वी जीवनवाला होता है। हितकर कर्मों में प्रवृत्त हुआ हुआ यह सदा यश को प्राप्त होता है। परन्तु यशस्वी होता हुआ (स सोम्यः) = वह अत्यन्त विनीत व शान्त होता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - इन्द्र वह है जो - [क] इन्द्रियों के संयम के द्वारा 'ओजिष्ठ' बनता है, [ख] सोमरक्षण जनित उल्लास में सदा हितकर कर्मों में प्रवृत्त होता है, [ग] ज्ञान- ज्योति को ही अपना ऐश्वर्य बनाता है, [घ] यशस्वी जीवनवाला होता है, [ङ] आशयेन विनीत होता है।
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Indra, mind and intelligence, was created for enlightenment and for giving enlightenment. Most lustrous and powerful, it is engaged in the creation of joy. It is rich in the wealth of knowledge, praise-worthy, and cool, gentle and at peace in the state of enlightenment.
