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देवता: इन्द्र: ऋषि: सुकक्षः छन्द: गायत्री स्वर: षड्जः

ये सोमा॑सः परा॒वति॒ ये अ॑र्वा॒वति॑ सुन्वि॒रे । सर्वाँ॒स्ताँ इ॑न्द्र गच्छसि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ye somāsaḥ parāvati ye arvāvati sunvire | sarvām̐s tām̐ indra gacchasi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ये । सोमा॑सः । प॒रा॒ऽवति॑ । ये । अ॒र्वा॒ऽवति॑ । सु॒न्वि॒रे । सर्वा॑न् । तान् । इ॒न्द्र॒ । ग॒च्छ॒सि॒ ॥ ८.९३.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:93» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:22» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:6


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सोमासः परावति

पदार्थान्वयभाषाः - [१] गत मन्त्र के अनुसार अपने अमरत्व को पहचानने पर तथा विषयों की तुच्छता को समझने पर (ये) = जो (सोमासः) = सोमकण (परावति) = उस सुदूर मस्तिष्करूप द्युलोक के निमित्त (सुन्विरे) = उत्पन्न किये गये हैं, अथवा (ये) = जो (अर्वावति) = समीपस्थ इस शरीररूप पृथिवीलोक के निमित्त उत्पन्न किये गये हैं, हे (इन्द्र) = जितेन्द्रिय पुरुष ! तू (तान् सर्वान्) = उन सब सोमकणों को गच्छसि = प्राप्त होता है। [२] अपने अमरत्व को समझकर, विषयों से ऊपर उठने पर ही सोमकणों का रक्षण होता है। इनके रक्षण से ही मस्तिष्करूप द्युलोक दीप्त तथा शरीररूप पृथिवीलोक दृढ़ बनता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम अपने को अमर जानें। विषयों की तुच्छता को पहचानें। सोमकणों का रक्षण करते हुए मस्तिष्क को दीप्त बनायें तथा शरीर को दृढ़ करें।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, O dynamic intelligence, protector of the knowledge of truth and reality, whatever somas of knowledge, culture and enlightenment are distilled either far away or close at hand, pray you move there to record and protect them for us.