यद्वा॑ प्रवृद्ध सत्पते॒ न म॑रा॒ इति॒ मन्य॑से । उ॒तो तत्स॒त्यमित्तव॑ ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
yad vā pravṛddha satpate na marā iti manyase | uto tat satyam it tava ||
पद पाठ
यत् । वा॒ । प्र॒ऽवृ॒द्ध॒ । स॒त्ऽप॒ते॒ । न । म॒रै॒ । इति॑ । मन्य॑से । उ॒तो इति॑ । तत् । स॒त्यम् । इत् । तव॑ ॥ ८.९३.५
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:93» मन्त्र:5
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:21» मन्त्र:5
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:5
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अपने अमरत्व को पहचानना
पदार्थान्वयभाषाः - [१] प्रभु जीव से कह रहे हैं कि हे (प्रवृद्ध) = ज्ञान के दृष्टिकोण से वृद्धि को प्राप्त हुए-हुए (सत्पते) = उत्तम कर्मों के रक्षक जीव ! (यद्वा) = जब निश्चय से ('न मरा') = मैं मरता नहीं, मैं अमर हूँ' (इति मन्यसे) = इस प्रकार तू मानता है तो (उत उ) = निश्चय से (तव) = तेरा (तत्) = वह अपने को अमर जानना (सत्यं इत्) = सत्य ही है। [२] अपने अमरत्व को पहचानने पर ही तू वास्तविक सत्य को पानेवाला होता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- -हम अपने अमरत्व को पहचानकर शरीर आदि में 'मैं' की बुद्धि से ऊपर उठें। यही ज्ञान हमें प्राकृतिक भोगों की तुच्छता को स्पष्ट करता हुआ उनके बन्धन में पड़ने से बचायेगा ।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Indra, O mind, O soul, ever rising as the world expands, protector of truth and reality, if you believe and say in all faith that “I shall not die”, then it shall be true, an inviolable reality.
