त्वं हि वृ॑त्रहन्नेषां पा॒ता सोमा॑ना॒मसि॑ । उप॑ नो॒ हरि॑भिः सु॒तम् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
tvaṁ hi vṛtrahann eṣām pātā somānām asi | upa no haribhiḥ sutam ||
पद पाठ
त्वम् । हि । वृ॒त्र॒ऽह॒न् । ए॒षा॒म् । पा॒ता । सोमा॑नाम् । असि॑ । उप॑ । नः॒ । हरि॑ऽभिः । सु॒तम् ॥ ८.९३.३३
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:93» मन्त्र:33
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:27» मन्त्र:3
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:33
0 बार पढ़ा गया
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सोमानां पाता
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वृत्रहन्) = वासनाओं को विनष्ट करनेवाले प्रभो ! (त्वं हि) = आप ही (एषाम्) = इन (सोमानाम्) = सोमकणों के पाता (असि) = रक्षक हैं। वस्तुतः इनके रक्षण का सामर्थ्य हमारे में नहीं है। प्रभु ही वासनाओं के विनाश के द्वारा इन सोमकणों का रक्षण करते हैं। [२] हे प्रभो ! (नः) = हमें (हरिभिः) = इन इन्द्रियाश्वों के हेतु से, इन्हें सबल बनाने के दृष्टिकोण से (सुतम्) = शरीर में उत्पन्न सोम को (उप) = समीपता से प्राप्त कराइये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- शरीर में सोमरक्षण का सामर्थ्य हमें प्रभु ही प्राप्त कराते हैं। प्रभु ही वस्तुत: इन सोमकणों का रक्षण करते हैं।
0 बार पढ़ा गया
डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Indra, O soul, dispeller of darkness and ignorance, you are the experiencer of the joyous soma pleasures of life. Rise and enjoy the knowledge and wisdom collected and offered by the senses, mind and intelligence.
