द्वि॒ता यो वृ॑त्र॒हन्त॑मो वि॒द इन्द्र॑: श॒तक्र॑तुः । उप॑ नो॒ हरि॑भिः सु॒तम् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
dvitā yo vṛtrahantamo vida indraḥ śatakratuḥ | upa no haribhiḥ sutam ||
पद पाठ
द्वि॒ता । यः । वृ॒त्र॒हन्ऽत॑मः । वि॒दे । इन्द्रः॑ । श॒तऽक्र॑तुः । उप॑ । नः॒ । हरि॑ऽभिः । सु॒तम् ॥ ८.९३.३२
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:93» मन्त्र:32
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:27» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:32
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
शतक्रतु
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (द्विता) = [द्वौ तनोति] शक्ति व ज्ञान के विस्तार के द्वारा (यः) = जो (वृत्रहन्तमः) = वासनाओं का अधिक से अधिक विनाश करनेवाला है, वह (इन्द्रः) = परमैश्वर्यवाला प्रभु (शतक्रतुः) = अनन्त प्रज्ञान व शक्तिवाला (विदे) = जाना जाता है। [२] यह प्रभु (नः) = हमें (हरिभिः) = इन्द्रियों के होने से (सुतम्) = शरीर में उत्पन्न सोम को (उप) = समीपता से प्राप्त कराये। इस सुरक्षित सोम ने ही तो इन्द्रियों को शक्ति सम्पन्न बनाना है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु शक्ति व ज्ञान के विस्तार के द्वारा हमारी वासनाओं का विनाश करते हमें भी सोमरक्षण द्वारा अपने समान 'शतक्रतु' बनाते हैं।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Indra, hero of a hundred noble actions, greatest destroyer of darkness who know both the way of knowledge and the way of karma for the good life, come to taste our soma of homage prepared by us with our heart and soul for you.
