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देवता: इन्द्र: ऋषि: सुकक्षः छन्द: गायत्री स्वर: षड्जः

तुभ्यं॒ सोमा॑: सु॒ता इ॒मे स्ती॒र्णं ब॒र्हिर्वि॑भावसो । स्तो॒तृभ्य॒ इन्द्र॒मा व॑ह ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tubhyaṁ somāḥ sutā ime stīrṇam barhir vibhāvaso | stotṛbhya indram ā vaha ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तुभ्य॑म् । सोमाः॑ । सु॒ताः । इ॒मे । स्ती॒र्णम् । ब॒र्हिः । वि॒भा॒व॒सो॒ इति॑ विभाऽवसो । स्तो॒तृऽभ्यः॑ । इन्द्र॑म् । आ । व॒ह॒ ॥ ८.९३.२५

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:93» मन्त्र:25 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:25» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:25


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सोमरक्षण- प्रभु प्राप्ति महत्त्व का अनुभव

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (विभावसो) = विशिष्ट दीप्तियों के निवास स्थानभूत प्रभो! (तुभ्यम्) = आपकी प्राप्ति के लिये ही (इमे सोमाः सुताः) = ये सोमकण सम्पादित हुए हैं। शरीर में सोमकणों के रक्षण से ही उस महान् सोम [ शान्त प्रभु] की प्राप्ति होती है। हे प्रभो ! (बर्हिः स्तीर्णम्) = यह हृदयासन आप के बैठने के लिये बिछाया गया है। [२] हे प्रभो ! स्(तोतृभ्यः) = हम स्तोताओं के लिये (इन्द्रम्) = [इन्द्र=greatness] महत्त्व को, बड़प्पन को आवह प्राप्त कराइये। आपका स्तवन करते हुए हम बड़े बनें और तुच्छ भोगों से ऊपर उठें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण द्वारा हम अपने हृदयासन पर प्रभु को बिठायें और अपने महत्त्व को समझते हुए तुच्छ भोगों से ऊपर उठें।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord of light, the soma delicacies distilled and seasoned are ready for you. The holy grass seats are spread on the vedi. Pray come in and bring in Indra, wealth, honour and excellence of life for the celebrants.