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नव॒ यो न॑व॒तिं पुरो॑ बि॒भेद॑ बा॒ह्वो॑जसा । अहिं॑ च वृत्र॒हाव॑धीत् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

nava yo navatim puro bibheda bāhvojasā | ahiṁ ca vṛtrahāvadhīt ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

नव॑ । यः । न॒व॒तिम् । पुरः॑ । बि॒भेद॑ । बा॒हुऽओ॑जसा । अहि॑म् । च॒ । वृ॒त्र॒ऽहा । अ॒व॒धी॒त् ॥ ८.९३.२

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:93» मन्त्र:2 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:21» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:2


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

नवनवति पुरियों का भेदन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] प्रभु वे हैं (यः) = जो (बाह्वोजसा) = बाहुओं के पराक्रम से (नवनवतिम्) = निन्यानवे (पुर:) = असुरों की पुरियों को, अनेकों आसुरभावों को बिभेद विदीर्ण कर देते हैं। [२] (च) = और (वृत्रहा) = वासनाओं को नष्ट करनेवाले वे प्रभु (अहिम्) = इस (आहन्ता) = कामरूप शत्रु का (अवधीत्) = वध कर डालते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - प्रभु ही असुरों की पुरियों का विध्वंस करते हैं। वे ही विनाशक वासनाओं का विलय करते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra who breaks off the nine and ninty strongholds of darkness, ignorance and suffering by the force of his lustrous arms and, as the dispeller of darkness, destroys the crooked serpentine evil of the world: