कया॒ त्वं न॑ ऊ॒त्याभि प्र म॑न्दसे वृषन् । कया॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
kayā tvaṁ na ūtyābhi pra mandase vṛṣan | kayā stotṛbhya ā bhara ||
पद पाठ
कया॑ । त्वम् । नः॒ । ऊ॒त्या । अ॒भि । प्र । म॒न्द॒से॒ । वृ॒ष॒न् । कया॑ । स्तो॒तृऽभ्यः॑ । आ । भ॒र॒ ॥ ८.९३.१९
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:93» मन्त्र:19
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:24» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:19
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
कया उत्या
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वृषन्) = सुखों का वर्षण करनेवाले प्रभो ! (त्वम्) = आप (नः) = हमारे लिये (कया उत्या) = कल्याणकर रक्षण के द्वारा (अभि प्रमन्दसे) = आनन्दित करनेवाले होते हैं। आप से रक्षित हुए हुए हम इह लोक के अभ्युदय व परलोक के निःश्रेयस को [अभि] प्राप्त करनेवाले बनकर आनन्द लाभ कर पाते हैं। [२] हे प्रभो! आप इस (कया) = कल्याणकर [ आनन्दमय] रक्षण के द्वारा (स्तोतृभ्यः) = स्तोताओं के लिये (आभर) = समन्तात् भरण व पोषण के लिये होइये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु के रक्षण में हम इहलोक व परलोक की उन्नति करते हुए आनन्दित हों । प्रभु के रक्षण में हम ठीक से भरण व पोषण में समर्थ हों ।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord of power and prosperity, generous as cloud showers, by which modes of protection and promotion do you bless us with the joys we have, by which methods and graces do you bear and bring the wealth which the celebrants enjoy?
