अ॒या धि॒या च॑ गव्य॒या पुरु॑णाम॒न्पुरु॑ष्टुत । यत्सोमे॑सोम॒ आभ॑वः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ayā dhiyā ca gavyayā puruṇāman puruṣṭuta | yat some-soma ābhavaḥ ||
पद पाठ
अ॒या । धि॒या । च॒ । ग॒व्य॒ऽया । पुरु॑ऽनामन् । पुरु॑ऽस्तुत । यत् । सोमे॑ऽसोमे । आ । अभ॑वः ॥ ८.९३.१७
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:93» मन्त्र:17
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:24» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:17
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
गव्या धी
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (पुरुणामन्) = अनन्त स्तोत्रोंवाले, पुरुष्टुत खूब ही स्तुति किये गये प्रभो ! (यत्) = जब (सोमे सोमे) = सोमकणों के रक्षित होने पर आप (आभवः) = [भू प्राप्तौ ] हमें प्राप्त होते हैं, तो (च) = निश्चय से (अया) = इस (गव्यया) = ज्ञान की वाणियों की कामनावाली (धिया) = बुद्धि से हमें प्राप्त होते हैं। आप हमारे लिये उस बुद्धि को प्राप्त कराते हैं, जो ज्ञान की वाणियों की कामनावाली होती है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु के स्तोत्रों का गायन करें। यह गायन हमें ज्ञान की वाणियों की रुचिवाली बुद्धि को प्राप्त करायेगा।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Indra, O higher mind, O soul, O awareness of divinity, who are adored by many, celebrated by many many names in many ways, arise in every person in every soma yajna by with virtue of this intelligence, this knowledge and this awareness which nature has given to every person.
