वि यदहे॒रध॑ त्वि॒षो विश्वे॑ दे॒वासो॒ अक्र॑मुः । वि॒दन्मृ॒गस्य॒ ताँ अम॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
vi yad aher adha tviṣo viśve devāso akramuḥ | vidan mṛgasya tām̐ amaḥ ||
पद पाठ
वि । यत् । अहे॑ । अध॑ । त्वि॒षः । विश्वे॑ । दे॒वासः॑ । अक्र॑मुः । वि॒दत् । मृ॒गस्य॑ । तान् । अमः॑ ॥ ८.९३.१४
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:93» मन्त्र:14
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:23» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:14
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
मृग के अम की प्राप्ति
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (विश्वे देवास:) = सब देववृत्ति के पुरुष (यद्) = जब (अहे:) = आहनन करनेवाले इस वृत्रासुर की, वासना की (त्विषः) = दीप्तियों को (वि अक्रमुः) = विशेषरूप से आक्रान्त करते हैं, (अध) = तो अब (तान्) = उन देवों को (मृगस्य) = उस अन्वेषणीय प्रभु का (अम:) = बल (विदत्) = प्राप्त होता है। [२] वासना को जीतकर ही हम अपने अन्दर प्रभु के प्रकाश को देखनेवाले बनते हैं। वासना ज्ञान पर परदे के रूप में पड़ी रहती है, इसी से यह 'वृत्र' कहलाती है। इसका नाश हुआ प्रभु का और प्रकाश हुआ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- देव लोग वासना की दीप्ति को आक्रान्त करके प्रभु की शक्ति से शक्ति सम्पन्न बनते हैं।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - When all the divine perceptive senses and conceptive faculties of the mind rise to fight the dark powers of evil, Indra, the soul, the higher mind, realises the fierce powers of evil and stirs:
