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शिक्षा॑ ण इन्द्र रा॒य आ पु॒रु वि॒द्वाँ ऋ॑चीषम । अवा॑ न॒: पार्ये॒ धने॑ ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

śikṣā ṇa indra rāya ā puru vidvām̐ ṛcīṣama | avā naḥ pārye dhane ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

शिक्ष॑ । नः॒ । इ॒न्द्र॒ । रा॒यः । आ । पु॒रु । वि॒द्वान् । ऋ॒ची॒ष॒म॒ । अव॑ । नः॒ । पार्ये॑ । धने॑ ॥ ८.९२.९

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:9 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:16» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:9


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

पार्यधन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (ऋचीषम) = [ऋच्, ईष् गतो] स्तुति के द्वारा गन्तव्य प्रभो ! (नः) = हमें (रायः) = धनों को (आशिक्ष) = दीजिये। हे (इन्द्र) = सब शत्रुओं के विद्रावक प्रभो! आप (पुरु) = खूब ही (विद्वान्) = ज्ञानवान् हैं। हमारे लिये आवश्यक धनों को आप प्राप्त कराते ही हैं। [२] हे प्रभो! आप (नः) = हमें (पार्ये धने) = जीवन यात्रा के पूर्ण करने के लिये आवश्यक धन से (अवा) = रक्षित करिये। आवश्यक धन प्राप्त कराके आप हमारा रक्षण करिये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु स्तुति के द्वारा सान्निध्य के योग्य हैं। वे हमें जीवन-यात्रा के लिये आवश्यक धन को प्राप्त कराते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, leader in knowledge and wisdom, pursuer of the path of rectitude, guide and lead us to ample wealth and protect us through our struggle for victory of honour and excellence.