वांछित मन्त्र चुनें
341 बार पढ़ा गया

यु॒ध्मं सन्त॑मन॒र्वाणं॑ सोम॒पामन॑पच्युतम् । नर॑मवा॒र्यक्र॑तुम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yudhmaṁ santam anarvāṇaṁ somapām anapacyutam | naram avāryakratum ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यु॒ध्मम् । सन्त॑म् । अ॒न॒र्वाण॑म् । सो॒म॒ऽपाम् । अन॑पऽच्युतम् । नर॑म् । अ॒वा॒र्यऽक्र॑तुम् ॥ ८.९२.८

341 बार पढ़ा गया
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:8 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:16» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:8


हरिशरण सिद्धान्तालंकार

युध्मं [प्रभुम्] आच्यावयसि

पदार्थान्वयभाषाः - [१] उस प्रभु को प्राप्त करो जो (युध्मम्) = तुम्हारे शत्रुओं के साथ युद्ध करनेवाले हैं। (सन्तम्) = जो सदा विद्यमान हैं, सत्यस्वरूप हैं। (अनर्वाणम्) = हिंसित न होने देनेवाले हैं। (सोमपाम्) = सोम का रक्षण करनेवाले हैं। (अनपच्युतम्) = शत्रुओं द्वारा पराभूत न होनेवाले हैं। [२] वे प्रभु ही (नरम्) = हमें उन्नतिपथ पर ले चलनेवाले हैं व (अवार्यक्रतुम्) = अनिवारणीय शक्ति व प्रज्ञानवाले हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु को प्राप्त करके ही हम युद्ध में शत्रुओं का पराभव कर पाते हैं। यह प्रभु- स्मरण ही हमारे सोमरक्षण का साधन बनता है और हमें उन्नतिपथ पर ले चलता है।

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - The ruler, warrior that hits the target, being irresistible, protector and valuer of life’s joy, inviolable and unsurpassable leader in irrevocable action: such is Indra, elevated ruler.