अ॒स्य पी॒त्वा मदा॑नां दे॒वो दे॒वस्यौज॑सा । विश्वा॒भि भुव॑ना भुवत् ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
asya pītvā madānāṁ devo devasyaujasā | viśvābhi bhuvanā bhuvat ||
पद पाठ
अ॒स्य । पी॒त्वा । मदा॑नाम् । दे॒वः । दे॒वस्य॑ । ओज॑सा । विश्वा॑ । अ॒भि । भुव॑ना । भु॒व॒त् ॥ ८.९२.६
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:6
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:16» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:6
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
निरक्षण द्वारा विजय
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (अस्य) = इस सोम का (पीत्वा) = पान करके (मदानाम्) = हर्षों व उल्लासों का (देवः) = अपने में क्रीडन करनेवाला होता है। सोमी पुरुष के जीवन में उल्लासों की क्रीडा होती है। [२] यह सोमी पुरुष (देवस्य ओजसा) = उस महादेव प्रभु के ओज [बल] से (विश्वा भुवना अभिभुवत्) = सब भुवनों को अभिभूत करनेवाला, सब पर विजय पानेवाला होता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण से जीवन उल्लासमय बनता है। प्रभु की शक्ति से शक्ति सम्पन्न होकर यह सोमी पुरुष सब भुवनों का विजय करता है।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Exalted by the joyous power of this soma offering of the people, the brilliant and generous Indra rules over all regions of the world by light and lustre worthy of a ruler.
