ए॒वा ह्यसि॑ वीर॒युरे॒वा शूर॑ उ॒त स्थि॒रः । ए॒वा ते॒ राध्यं॒ मन॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
evā hy asi vīrayur evā śūra uta sthiraḥ | evā te rādhyam manaḥ ||
पद पाठ
ए॒व । हि । असि॑ । वी॒र॒ऽयुः । ए॒व । शूरः॑ । उ॒त । स्थि॒रः । ए॒व । ते॒ । राध्य॑म् । मनः॑ ॥ ८.९२.२८
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:28
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:20» मन्त्र:2
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:28
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
वीर-शूर - स्थिर
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = शत्रु-विद्रावक प्रभो! आप (हि) = निश्चय से (वीरयुः) = वीरों को प्राप्त होने की कामनावाले (असि एव) = हैं ही। वीरों को आप प्राप्त होते हैं। आप (एवा) = सचमुच (शूरः) = शूरवीर हैं (उत) = और (स्थिरः) = स्थिर हैं, शत्रुओं से विचलित किये जानेवाले नहीं हैं। [२] (एवा) = सचमुच (ते) = आपके द्वारा ही (मनः राध्यम्) = मन वश में करने योग्य है। आपकी उपासना से ही एक उपासक अपने मन को वश में कर पाता है। उपासक भी उपास्य प्रभु के समान 'वीर, शूर व स्थिर' बनता है और मन को वश में करता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु की उपासना करते हुए प्रभु के समान ही 'वीर, शूर व स्थिर' बनें। ऐसा बनकर हम मन को भी वश में कर पायेंगे।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - You love and honour the brave, you are brave yourself, you are definite in intention and undisturbed in attitudes. You are now ripe for the perfection of mind to experience the soul’s beatitude in, divine presence.
