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प॒रा॒कात्ता॑च्चिदद्रिव॒स्त्वां न॑क्षन्त नो॒ गिर॑: । अरं॑ गमाम ते व॒यम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

parākāttāc cid adrivas tvāṁ nakṣanta no giraḥ | araṁ gamāma te vayam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

प॒रा॒कात्ता॑त् । चि॒त् । अ॒द्रि॒ऽवः॒ । त्वाम् । न॒क्ष॒न्त॒ । नः॒ । गिरः॑ । अर॑म् । ग॒मा॒म॒ । ते॒ । व॒यम् ॥ ८.९२.२७

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:27 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:20» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:27


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

प्रभु-स्तवन व प्रभु प्राप्ति

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अद्रिवः) = आदरणीय प्रभो ! (पराकातात् चित्) = अत्यन्त सुदूर देश से भी (नः गिरः) = हमारी स्तुति-वाणियाँ (त्वां नक्षन्त) = आपको प्राप्त होती हैं। हम चाहे आप से कितनी भी दूर हैं, अभी आपके दर्शन के पात्र चाहे नहीं भी बन पाये हैं, तो भी आपकी सत्ता में निष्ठा रखते हुए हम आपका स्तवन करते हैं। [२] हे प्रभो ! इस प्रकार आपका स्तवन करते हुए (वयम्) = हम (ते) = आपके प्रति (अरं गमाम) = खूब ही गतिवाले हों। आपके समीप और समीप प्राप्त होनेवाले हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु से दूर होते हुए भी हम प्रभु का स्तवन करें। प्रभु-स्तवन करते हुए हम प्रभु को समीपता से प्राप्त होनेवाले हों।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord of clouds and mountains, wielder of thunder and lightning, our songs of adoration reach you even from far where we happen to be. We pray we may realise your presence intimately by direct experience of the spirit, beyond thought and speech.