वांछित मन्त्र चुनें

अरं॑ त इन्द्र कु॒क्षये॒ सोमो॑ भवतु वृत्रहन् । अरं॒ धाम॑भ्य॒ इन्द॑वः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

araṁ ta indra kukṣaye somo bhavatu vṛtrahan | araṁ dhāmabhya indavaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अर॑म् । ते॒ । इ॒न्द्र॒ । कु॒क्षये॑ । सोमः॑ । भ॒व॒तु॒ । वृ॒त्र॒ऽह॒न् । अर॑म् । धाम॑ऽभ्यः । इन्द॑वः ॥ ८.९२.२४

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:24 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:19» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:24


0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

धामभ्यः अरम्

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वृत्रहन्) = वासनाओं को विनष्ट करनेवाले (इन्द्र) = सर्वशक्तिमन् प्रभो ! (सोमः) = यह सोम (ते कुक्षये) = आप से दी गई इस कुक्षि के लिये (अरं भवतुम्) = भूषित करनेवाला हो। यह सोम कुक्षि में ही सुरक्षित रहकर उसे भूषित करे। [२] हे प्रभो ! ये (इन्दवः) = सोमकण (धामभ्यः) = सब तेजों के लिये (अरम्) = पर्याप्त हों। इनके रक्षण से तेजस्विता का लाभ हो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - शरीर में सुरक्षित सोम शरीर को अलंकृत करे। सब तेजों को यह प्राप्त करानेवाला हो ।
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, O lord of power and joy, destroyer of evil and suffering, let there be ample soma to fill the space in the womb of existence, and let the flow of soma be profuse for all the forms of existence.