त्रिक॑द्रुकेषु॒ चेत॑नं दे॒वासो॑ य॒ज्ञम॑त्नत । तमिद्व॑र्धन्तु नो॒ गिर॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
trikadrukeṣu cetanaṁ devāso yajñam atnata | tam id vardhantu no giraḥ ||
पद पाठ
त्रिऽक॑द्रुकेषु । चेत॑नम् । दे॒वासः॑ । य॒ज्ञम् । अ॒त्न॒त॒ । तम् । इत् । व॒र्ध॒न्तु॒ । नः॒ । गिरः॑ ॥ ८.९२.२१
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:21
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:19» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:21
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
ज्योतिः, गौर, आयुः [त्रिकद्रुक]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (त्रिकद्रुकेषु) = 'ज्योतिः गौ: आयुः ' 'हमें ज्योति प्राप्त कराओ, हमारे लिये उत्तम इन्द्रियों को प्राप्त कराइये [गौ] तथा हमें दीर्घजीवी बनाइये' इस प्रकार तीनों आह्वानों के होने पर [कदि आह्वाने] (चेतनम्) = चेतना को, ज्ञान को देनेवाले (यज्ञम्) = पूजनीय प्रभु को (देवासः) = देववृत्ति के पुरुष (अत्नत) = अपने में विस्तृत करते हैं। [२] (नः गिरः) = हमारी ये वाणियाँ भी (तं इत्) = उस प्रभु का ही (वर्धन्तु) = वर्धन करें। हम वाणियों से प्रभु का ही स्तवन करें। प्रभु हमारे ज्ञान को बढ़ायेंगे, हमें उत्तम इन्द्रियों को प्राप्त करायेंगे और इस प्रकार हमें प्रशस्त दीर्घ जीवनवाला करेंगे।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु का ही देववृत्ति के पुरुष पुकारते हैं। प्रभु-स्तवन करते हुए वे ज्ञान के प्रकाश को, उत्तम इन्द्रियों को व दीर्घजीवन को प्राप्त करते हैं।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - In three modes of body, mind and soul, the devas, seven senses, the human consciousness and the noble yogis, concentrate on Indra, divine consciousness. In three regions of the universe, noble souls meditate on the universal consciousness of the divine Indra. Thus they perform the yajna of divinity in communion. May all our songs of adoration glorify that supreme consciousness, Indra.
