यस्मि॒न्विश्वा॒ अधि॒ श्रियो॒ रण॑न्ति स॒प्त सं॒सद॑: । इन्द्रं॑ सु॒ते ह॑वामहे ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
yasmin viśvā adhi śriyo raṇanti sapta saṁsadaḥ | indraṁ sute havāmahe ||
पद पाठ
यस्मि॑न् । विश्वाः॑ । अधि॑ । श्रियः॑ । रण॑न्ति । स॒प्त । स॒म्ऽसदः॑ । इन्द्र॑म् । सु॒ते । ह॒वा॒म॒हे॒ ॥ ८.९२.२०
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:20
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:18» मन्त्र:5
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:20
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'श्री का आधार' विष्णु
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (यस्मिन्) = जिन प्रभु में (विश्वाः श्रियः) = सब लक्ष्मियाँ (अधि) = आधिक्येन निवास करती हैं। जिस प्रभु के विषय में (सप्त) = सातों (संसदः) = होता 'कर्माविमौनासिके चक्षणी मुखम्' (रणन्ति) = स्तवन करते हैं। उस (इन्द्रम्) = परमैश्वर्यशाली प्रभु को, सब इन्द्रियों को शक्ति देनेवाले प्रभु को (सुते) = इस सोम के सम्पादन व रक्षण के निमित्त हवामहे पुकारते हैं। प्रभु ने ही वासना विनाश द्वारा इस सोम का रक्षण करना है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु ही सब श्रियों के आधार हैं। प्रभु ने ही कर्ण आदि इन्द्रियों को श्री - सम्पन्न बनाना है। इस श्री सम्पन्नता के लिये प्रभु ही सोम का सम्पादन व रक्षण करते हैं।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - In our soma yajna of life, in meditation, and in the holy business of living, we invoke Indra, in whom all beauties and graces abide, whom all the seven seers in yajna adore, in whom all five senses, mind and intelligence subside absorbed, and under whom all the seven assemblies of the world unite, meet and act.
