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पु॒रु॒हू॒तं पु॑रुष्टु॒तं गा॑था॒न्यं१॒॑ सन॑श्रुतम् । इन्द्र॒ इति॑ ब्रवीतन ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

puruhūtam puruṣṭutaṁ gāthānyaṁ sanaśrutam | indra iti bravītana ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

पु॒रु॒ऽहू॒तम् । पु॒रु॒ऽस्तु॒तम् । गा॒था॒न्य॑म् । सन॑ऽश्रुतम् । इन्द्रः॑ । इति॑ । ब्र॒वी॒त॒न॒ ॥ ८.९२.२

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:2 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:15» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:2


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

इन्द्र

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (पुरुहूतम्) = [ पुरु हूतं यस्य] पालन व पूरण करनेवाली है पुकार जिसकी - जिसकी आराधना से शरीर नीरोग बनता है और मन पवित्र होता है, (पुरुष्टुतम्) = जो खूब ही स्तुत होता है, सम्पूर्ण वेद जिसका स्तवन कर रहा है (गाथान्यम्) = जो गायन के योग्य हैं और (सनश्रुतम्) = सदा से [सनातन काल से] प्रसिद्ध हैं, पुराण पुरुष हैं। उन प्रभु को (इन्द्रः) = वे परमैश्वर्यशाली हैं, सर्वशक्तिमान् हैं, शत्रुओं का विद्रावण करनेवाले हैं [इदि परमैश्वर्ये, सर्वाणि बल कर्माणि इन्द्रस्य, इनः सन् शत्रून् द्रावयति ] (इति) = इस प्रकार (ब्रवीतन) = व्यक्त रूप से गाओ। 'इन्द्र' नाम से प्रभु का गायन करो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-उस सनातन प्रभु को हम 'इन्द्र' नाम से स्मरण करें। इन्द्र ही बनने का प्रयत्न करें।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Call him by the name and title of ‘Indra’, invoked by many, adored by all, worthy of celebration in story, all time famous who is also a scholar of universal knowledge.