इन्द्रा॑य॒ मद्व॑ने सु॒तं परि॑ ष्टोभन्तु नो॒ गिर॑: । अ॒र्कम॑र्चन्तु का॒रव॑: ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
indrāya madvane sutam pari ṣṭobhantu no giraḥ | arkam arcantu kāravaḥ ||
पद पाठ
इन्द्रा॑य । मद्व॑ने । सु॒तम् । परि॑ । स्तो॒भ॒न्तु॒ । नः॒ । गिरः॑ । अ॒र्कम् । अ॒र्च॒न्तु॒ । का॒रवः॑ ॥ ८.९२.१९
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:19
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:18» मन्त्र:4
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:19
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सोम का स्वाध्याय व स्तवन द्वारा शरीर में स्तोभन [रोकना]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] उस (मद्वने) = [मद्+वन्] हर्ष का सम्भजन करनेवाले, आनन्दस्वरूप (इन्द्राय) = परमैश्वर्यशाली प्रभु की प्राप्ति के लिये (नः गिरः) = हमारी ज्ञान की वाणियाँ (सुतं परिष्टोभन्तु) = उत्पन्न हुए हुए सोम को शरीर में ही चारों ओर रोकनेवाली हों। [ स्तोभते =stop] शरीर में सोम के सुरक्षित होने पर ही प्रभु की प्राप्ति होती है। [२] (कारवः) = क्रियाओं को कुशलता से करने के द्वारा प्रभु का अर्चन करनेवाले स्तोता (अर्कम्) = उस उपासनीय प्रभु का (अर्चन्तु) = पूजन करें। कर्त्तव्य कर्मों को करके उन्हें प्रभु के लिये अर्पित करना ही प्रभु का अर्चन है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-उस आनन्दमय प्रभु की प्राप्ति के लिये सोम का रक्षण आवश्यक है । सोमरक्षण के लिये स्वाध्याय व प्रभु-स्तवन साधन बनते हैं।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Let all our voices of admiration flow and intensify the soma for the joy of Indra, and let the poets sing songs of adoration for him and celebrate his achievements.
