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स नो॑ वृष॒न्त्सनि॑ष्ठया॒ सं घो॒रया॑ द्रवि॒त्न्वा । धि॒यावि॑ड्ढि॒ पुरं॑ध्या ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sa no vṛṣan saniṣṭhayā saṁ ghorayā dravitnvā | dhiyāviḍḍhi puraṁdhyā ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सः । नः॒ । वृ॒ष॒न् । सनि॑ष्ठया । सम् । घो॒रया॑ । द्र॒वि॒त्न्वा । धि॒या । अ॒वि॒ड्ढि॒ । पुर॑म्ऽध्या ॥ ८.९२.१५

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:15 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:17» मन्त्र:5 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:15


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'सनिष्ठा घोरा' धी

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (वृषन्) = सब सुखों व काम्य पदार्थों का वर्षण करनेवाले प्रभो ! (सः) = वे आप (नः) = हमें (धिया) = बुद्धि के द्वारा (अविड्ढि) = रक्षित करिये। बुद्धि ही 'मेधा' है, मेरा धारण करनेवाली है। [२] उस बुद्धि के द्वारा जो (सनिष्ठया) = [स-निष्ठया] प्रभु में पूर्ण निष्ठा व आस्थावाली है, अथवा [सन् संभक्तौ] सब उत्तम पदार्थों का सम्भजन करानेवाली है। (सं घोरया) = सम्यक् घोर है, शत्रुओं के लिये भयङ्कर है। (द्रविल्वा) = शत्रुओं को दूर भगानेवाली है तथा (पुरन्ध्या) = खूब पालन व पूरण करनेवाली है, बहुतों का धारण करनेवाली है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु हमें वह बुद्धि दें जो निष्ठावाली व सब पदार्थों को प्राप्त करानेवाली है। जो बुद्धि शत्रुओं के लिये भयङ्कर व शत्रुओं को दूर भगानेवाली है। वह बुद्धि प्रभु हमें दें जो बहुतों का धारण करनेवाली है।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord generous as rain showers, come and help us with constant and most favourable, venerable and sublime, instant and munificent friendly intelligence, planning and wisdom for action and advancement of the human community.