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त्वे सु पु॑त्र शव॒सोऽवृ॑त्र॒न्काम॑कातयः । न त्वामि॒न्द्राति॑ रिच्यते ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tve su putra śavaso vṛtran kāmakātayaḥ | na tvām indrāti ricyate ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्वे इति॑ । सु । पु॒त्र॒ । श॒व॒सः॒ । अवृ॑त्रन् । काम॑ऽकातयः । न । त्वाम् । इ॒न्द्र॒ । अति॑ । रि॒च्य॒ते॒ ॥ ८.९२.१४

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:14 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:17» मन्त्र:4 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:14


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

कामकातयः

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (शवसः) = पुत्र-बल के पुत्र, शक्ति के पुतले, सर्वशक्तिमन् प्रभो ! (कामकातयः) = [कामपराः कातयः शब्दाः येषां] नाना कामनाओं की प्रार्थना करनेवाले ये उपासक (त्वे सु अवृजन्) = आप में स्थित होते हुए उत्तम वृत्तिवाले होते हैं। आपका स्मरण करते हुए ये शुभ मार्ग से ही अपनी कामनाओं को पूर्ण करने के लिये यत्नशील होते हैं । [२] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (त्वां न अतिरिच्यते) = आप से कोई भी अधिक नहीं है। सो आपको छोड़कर और किस की आराधना करना।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु से ही हम सब काम्य पदार्थों की याचना करते हैं। प्रभु ही हमारी कामनाओं को पूर्ण करते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O protector and promoter of strength and courage, seekers of ambition and victory look up to you for inspiration and depend on you for encouragement. No one excels you in incentive and exhortation.