वांछित मन्त्र चुनें

विश्वा॒ हि म॑र्त्यत्व॒नानु॑का॒मा श॑तक्रतो । अग॑न्म वज्रिन्ना॒शस॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

viśvā hi martyatvanānukāmā śatakrato | aganma vajrinn āśasaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

विश्वा॑ । हि । म॒र्त्य॒ऽत्व॒ना । अ॒नु॒ऽका॒मा । श॒त॒क्र॒तो॒ इति॑ शतऽक्रतो । अग॑न्म । व॒ज्रि॒न् । आ॒ऽशसः॑ ॥ ८.९२.१३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:13 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:17» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:13


0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

मनुष्योचित कामनाएँ

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (शतक्रतो) = अनन्त शक्ति व प्रज्ञानवाले प्रभो ! (विश्वा हि) = सब ही (मर्त्यत्वना) = [मर्त्यत्वानि] मनुष्य (अनुकामा) = [कामान् अनुगतानि] कामनाओं से युक्त हैं। मनुष्य का बिलकुल निष्काम होना सम्भव नहीं । [२] सो हे (वज्रिन्) = वज्रहस्त प्रभो ! गतिशील प्रभो ! हम (आशसः) = आशंसनों को उन्नति के लिये साधनभूत पदार्थों की कामनाओं को अगन्म प्राप्त हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ-हम पत्थर की तरह जड़ न हों। उन्नति के लिये साधनभूत पदार्थों की कामनाओंवाले हों। उनकी पूर्ति के लिये गतिशील हों।
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O lord of a hundred noble actions, all mortals are moved by hopes and ambitions natural to humanity. O wielder of thunder and justice, let us too move forward and realise our hopes and ambitions.