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व॒यमु॑ त्वा शतक्रतो॒ गावो॒ न यव॑से॒ष्वा । उ॒क्थेषु॑ रणयामसि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

vayam u tvā śatakrato gāvo na yavaseṣv ā | uktheṣu raṇayāmasi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

व॒यम् । ऊँ॒ इति॑ । त्वा॒ । श॒त॒क्र॒तो॒ इति॑ शतऽक्रतो । गावः॑ । न । यव॑सेषु । आ । उ॒क्थेषु॑ । र॒ण॒या॒म॒सि॒ ॥ ८.९२.१२

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:12 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:17» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:12


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

स्तुति व प्रभु प्रियता

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (शतक्रतो) = अनन्त प्रज्ञान व शक्तिवाले प्रभो ! (वयम्) = हम (उ) = निश्चय से (त्वा) = आपको (उक्थेषु) = स्तोत्रों में (आरणयामसि) = रमणवाला करते हैं। इस प्रकार (न) = जैसे (यवसेषु गावः) = घासों में गौओं को। [२] हम इस प्रकार हृदय से आपके स्तोत्रों का उच्चारण करते हैं कि आप उन स्तोत्रों में प्रीतिवाले होते हैं। इन स्तोत्रों के द्वारा हम आपके प्रिय बनते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम स्तोत्रों के द्वारा प्रभु की प्रीति का सम्पादन करते हुए प्रभु से शक्ति व प्रज्ञान को प्राप्त करते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, achiever of a hundred noble victories, just as cows feel delight in green grass, so we give you the pleasure of victory in our songs of celebration.