अया॑म॒ धीव॑तो॒ धियोऽर्व॑द्भिः शक्र गोदरे । जये॑म पृ॒त्सु व॑ज्रिवः ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ayāma dhīvato dhiyo rvadbhiḥ śakra godare | jayema pṛtsu vajrivaḥ ||
पद पाठ
अया॑म । धीऽव॑तः । धियः॑ । अर्व॑त्ऽभिः । श॒क्र॒ । गो॒ऽद॒रे॒ । जये॑म । पृ॒त्ऽसु । व॒ज्रि॒ऽवः॒ ॥ ८.९२.११
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:11
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:17» मन्त्र:1
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:11
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
शक्र, गोदरे, वज्रिवः
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (शक्र) = शक्ति सम्पन्न (गोदरे) = ज्ञान की वाणियों के मर्मों को खोलनेवाले प्रभो! हम आपका स्तवन करते हुए (धीवतः) = प्रशस्त बुद्धि व कर्मोंवाले पुरुष के (धियः) = ज्ञानपूर्वक किये जानेवाले कर्मों को (आयाम) = प्राप्त हों। [२] हे (वज्रिवः) = वज्रहस्त अथवा गतिशील प्रभो ! हम (अर्वद्भिः) = आप से दिये गये इन इन्द्रियाश्वों के द्वारा (पृत्सु) = संग्रामों में (जयेम) = विजयी हों। हम ज्ञानेन्द्रियों से ज्ञान प्राप्ति में तथा कर्मेन्द्रियों से यज्ञादि उत्तम कर्मों में उत्पन्न हुए हुए वासनाओं को सदा जीतनेवाले बनें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - उपासित प्रभु हमें शक्ति सम्पन्न बनाते हैं, हमारे लिये ज्ञान की वाणियों के मर्मों को बींधते हैं, हमें क्रियाशील बनाते हैं। ज्ञानपूर्वक कर्मों में प्रवृत्त हुए हुए हम सदा वासना-संग्राम में विजयी बनें।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - O wielder of power and force, let us come to have leaders and warriors endowed with high intelligence and enlightened will for action and, O lord of thunderous power, in the development of lands and breaking of mountains, let us win our battles by virtue of our cavaliers and pioneers.
