अत॑श्चिदिन्द्र ण॒ उपा या॑हि श॒तवा॑जया । इ॒षा स॒हस्र॑वाजया ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
ataś cid indra ṇa upā yāhi śatavājayā | iṣā sahasravājayā ||
पद पाठ
अतः॑ । चि॒त् । इ॒न्द्र॒ । नः॒ । उप॑ । आ । या॒हि॒ । श॒तऽवा॑जया । इ॒षा । स॒हस्र॑ऽवाजया ॥ ८.९२.१०
ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:92» मन्त्र:10
| अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:16» मन्त्र:5
| मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:10
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
इषा [शतवाजया, सहस्रवाजया]
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो! आप (अतः चित्) = इसलिए ही, अर्थात् गतमन्त्र के अनुसार 'पार्य धन' को प्राप्त कराने के लिये ही (नः) = हमें (इषा) = प्रेरणा के साथ (उप आयाहि) = समीपता से प्राप्त होइये। आपकी प्रेरणा ही हमें उत्तम श्रमों में संलग्न करके इस 'पार्य धन' को प्राप्त करानेवाली होगी। [२] यह प्रेरणा (शतवाजया) = सैकड़ों शक्तियोंवाली है। सैकड़ों ही क्या (सहस्रवाजया) = सहस्रों शक्तियोंवाली है। अथवा शतवर्ष पर्यन्त सहस्रों शक्तियों को देनेवाली है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु हमें उस प्रेरणा के साथ प्राप्त हों, जो हमें शतवर्ष पर्यन्त सहस्रों शक्तियों को प्राप्त करानेवाली हो।
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - And from here, Indra, come to us, bring us the food of life for a hundredfold and a thousandfold victory of honour and excellence.
