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अ॒सौ च॒ या न॑ उ॒र्वरादि॒मां त॒न्वं१॒॑ मम॑ । अथो॑ त॒तस्य॒ यच्छिर॒: सर्वा॒ ता रो॑म॒शा कृ॑धि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

asau ca yā na urvarād imāṁ tanvam mama | atho tatasya yac chiraḥ sarvā tā romaśā kṛdhi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒सौ । च॒ । या । नः॒ । उ॒र्वरा॑ । आत् । इ॒माम् । त॒न्व॑म् । मम॑ । अथो॒ इति॑ । त॒तस्य॑ । यत् । शिरः॑ । सर्वा॑ । ता । रो॒म॒शा । कृ॒धि॒ ॥ ८.९१.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:91» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:14» मन्त्र:6 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:6


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

रोमशा

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! (असौ च या) = और जो वह (नः उर्वरा) = हमारी उर्वरा हृदयस्थली है, गत मन्त्र के अनुसार जो प्रेम के भावों के लिये अतिशयेन उपजाऊ है, उसको (आत्) = अब (इमाम्) = इस (मम तन्वम्) = मेरे शरीर को (अथ उ) = और अब (यत्) = जो (ततस्य) = विस्तृत ज्ञान का निधान (शिर:) = सिर है । (सर्वाता) = उन सब को (रोमशा कृधि) = [रु शब्दे] प्रभु-स्तवन में निवासवाला बनाइये। [२] हमारा मस्तिष्क, हमारा हृदय, हमारा शरीर सभी प्रभु-स्तवन में प्रवृत्त हों।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम हृदय, शरीर व मस्तिष्क सभी से प्रभु का स्तवन करनेवाले बनें। हृदय प्रभु के प्रेम से, शरीर प्रभु की शक्ति से व मस्तिष्क प्रभु के ज्ञान से परिपूर्ण हो ।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - And that which is the heart region and this body system of mine and the head region of the body which is to continue in the family line, let all these grow to maturity.