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आ च॒न त्वा॑ चिकित्सा॒मोऽधि॑ च॒न त्वा॒ नेम॑सि । शनै॑रिव शन॒कैरि॒वेन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā cana tvā cikitsāmo dhi cana tvā nemasi | śanair iva śanakair ivendrāyendo pari srava ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आ । च॒न । त्वा॒ । चि॒कि॒त्सा॒मः॒ । अधि॑ । च॒न । त्वा॒ । न । इ॒म॒सि॒ । शनैः॑ऽइव । श॒न॒कैःऽइ॑व । इन्द्रा॑य । इ॒न्दो॒ इति॑ । परि॑ । स्र॒व॒ ॥ ८.९१.३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:91» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:14» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:3


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

त्वा न अधीमसि चन [प्रभु को भूल ही जाते हैं]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! (त्वा) = आपको (चन) = [एव] ही (आचिकित्सामः) = जानने की कामना करते हैं। सामान्यतः इस संसार में विषयों में उलझकर (त्वा) = आपको (न अधि इमसि चन) = नहीं ही स्मरण करते हैं। विषयों का परदा पड़ते ही आप हमारे से ओझल हो जाते हैं। [२] हे (इन्दो) = सोम ! (शनैः इव) = कुछ धीमे-धीमे यह (शनकैः इव) = धीरे-धीरे ही इन्द्राय प्रभु की प्राप्ति के लिये (परिस्रव) = हमारे में परिस्तुत हो। धीमे-धीमे यह सोम अंग-प्रत्यंगों में व्याप्त होनेवाला हो । शान्तिपूर्वक अंगों में व्याप्त हुआ हुआ यह सोम हमारे जीवनों को इस प्रकार प्रकाशमय बनाता है कि हम प्रभु का दर्शन कर पाते हैं। तू
भावार्थभाषाः - भावार्थ - सामान्यतः विषयों में उलझा हुआ पुरुष प्रभु का स्मरण नहीं करता। हम प्रभु को जानने की कामना करें। इसी उद्देश्य से सोम को शरीर में सुरक्षित करने का प्रयत्न करें।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O soma, we are trying to know you and your efficacy, we do not yet know you in full. Slowly, O soma, slowly, drop by drop, flow for Indra, health and vigour of life.