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क॒न्या॒३॒॑ वार॑वाय॒ती सोम॒मपि॑ स्रु॒तावि॑दत् । अस्तं॒ भर॑न्त्यब्रवी॒दिन्द्रा॑य सुनवै त्वा श॒क्राय॑ सुनवै त्वा ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

kanyā vār avāyatī somam api srutāvidat | astam bharanty abravīd indrāya sunavai tvā śakrāya sunavai tvā ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

क॒न्या॑ । वाः । आ॒व॒ऽय॒ती । सोम॑म् । अपि॑ । स्रु॒ता । अ॒वि॒द॒त् । अस्त॑म् । भर॑न्ती । अ॒ब्र॒वी॒त् । इन्द्रा॑य । सु॒न॒वै॒ । त्वा॒ । श॒क्राय॑ । सु॒न॒वै॒ । त्वा॒ ॥ ८.९१.१

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:91» मन्त्र:1 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:14» मन्त्र:1 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:1


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

इन्द्राय शक्राय

पदार्थान्वयभाषाः - [१] 'वारयति इति' (वाः) = शत्रुओं का वारण करनेवाली यह (कन्या) = [ कन दीप्तौ ] दीप्त जीवनवाली बनती है। (अव आयती) = काम-क्रोध आदि से दूर गति करती हुई यह (स्रुता) = [स्रु गतौ] मार्ग पर चलने के द्वारा (सोमं अपि अविदत्) = सोम को भी प्राप्त करती है- अपने जीवन में सोम का रक्षण करनेवाली होती है। [२] (अस्तम्) = अपने इस शरीररूप गृह को (भरन्ती) = सोम के द्वारा भरती हुई परिपुष्ट करती हुई (अब्रवीत्) = यह कहती है कि हे सोम ! (इन्द्राय) = उस परमैश्वर्यशाली प्रभु की प्राप्ति के लिये (त्वा सुनवै) = मैं तुझे उत्पन्न करती हूँ। (शक्राय) = उस सर्वशक्तिमान् प्रभु की प्राप्ति के लिये (त्वा सुनवै) = मैं तुझे अपने में अभिषुत करती हूँ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम शत्रुओं का वारण करते हुए सोम का रक्षण करें। यह सोमरक्षण प्रभुप्राप्ति का साधन बनेगा। यह हमें भी 'इन्द्र व शक्त' बनायेगा।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - The maiden having consented to marry, whether she is emaciated in health or bubbling with energy, should get the soma, and while going home should speak to herself for autosuggestion: I prepare you, soma juice, for Indra, regenerative and procreative power, for shakra, strength and vigour of robust health.