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तमु॑ त्वा नू॒नम॑सुर॒ प्रचे॑तसं॒ राधो॑ भा॒गमि॑वेमहे । म॒हीव॒ कृत्ति॑: शर॒णा त॑ इन्द्र॒ प्र ते॑ सु॒म्ना नो॑ अश्नवन् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tam u tvā nūnam asura pracetasaṁ rādho bhāgam ivemahe | mahīva kṛttiḥ śaraṇā ta indra pra te sumnā no aśnavan ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तम् । ऊँ॒ इति॑ । त्वा॒ । नू॒नम् । अ॒सु॒र॒ । प्रऽचे॑तसम् । राधः॑ । भा॒गम्ऽइ॑व । ई॒म॒हे॒ । म॒हीऽइ॑व । कृत्तिः॑ । श॒र॒णा । ते॒ । इ॒न्द्र॒ । प्र । ते॒ । सु॒म्ना । नः॒ । अ॒श्न॒व॒त् ॥ ८.९०.६

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:90» मन्त्र:6 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:13» मन्त्र:6 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:6


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

प्रभु की शरण-शत्रुओं का महान् छेदन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (असुर) = प्राणशक्ति का संचार करनेवाले प्रभो ! (प्रचेतसम्) = प्रकृष्ट ज्ञानवाले (तं त्वा उ) = उन आपको ही (भागं इव) = जैसे पुत्र पिता से भजनीय [अपने भागरूप] धन को माँगता है, उसी प्रकार (नूनम्) = निश्चय से (राधः ईमहे) = कार्यसाधक धन की याचना करते हैं। आपने ही हमारे लिये इन धनों को प्राप्त कराना है। [२] हे (इन्द्र) = शत्रुविद्रावक प्रभो ! (ते) = आपकी (शरणा) = शरणागति (मही कृत्तिः इव) = अतिमहान् शत्रुछेदन के समान है। आपकी शरण में आने पर हमारे सब शत्रुओं का छेदन हो जाता है। इसलिए हम तो यही चाहते हैं कि (ते सुम्ना) = आपके स्तोत्र (नः) = हमें (प्र अश्नवन्) = प्रकर्षेण व्याप्त करनेवाले हों। हम आपका स्तवन करते हुए आपकी शक्ति से शक्तिसम्पन्न होकर सब शत्रुओं का छेदन व विद्रावण करनेवाले बनें।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु से कार्यसाधक धन की याचना करें। प्रभु की शरण हमारे शत्रुओं का छेदन करती है। सो हम सदा प्रभुस्तवन करते हुए प्रभु की शरण में रहने का प्रयत्न करें। 'काम, क्रोध व लोभ' रूप शत्रुओं को दूर करके यह 'आत्रेयी' [अविद्यमानाः त्रयो यस्याः] बनती है। शत्रुओं को दूर [अप] रोकने के कारण [अल] यह 'अपाला' कहलाती है । यही अगले सूक्त की ऋषिका है-
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord of vibrant energy and power, we look forward to you as our partner, enlightened ruler and master, and competent giver of reward for our action and endeavour. Your very presence is our shelter, a very home like the great mother earth, and we pray we may ever enjoy the favour of your good will and benevolence.