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त्वं दा॒ता प्र॑थ॒मो राध॑साम॒स्यसि॑ स॒त्य ई॑शान॒कृत् । तु॒वि॒द्यु॒म्नस्य॒ युज्या वृ॑णीमहे पु॒त्रस्य॒ शव॑सो म॒हः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tvaṁ dātā prathamo rādhasām asy asi satya īśānakṛt | tuvidyumnasya yujyā vṛṇīmahe putrasya śavaso mahaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्वम् । दा॒ता । प्र॒थ॒मः । राध॑साम् । अ॒सि॒ । असि॑ । स॒त्यः । ई॒शा॒न॒ऽकृत् । तु॒वि॒ऽद्यु॒म्नस्य॑ । युज्या॑ । आ । वृ॒णी॒म॒हे॒ । पु॒त्रस्य॑ । शव॑सः । म॒हः ॥ ८.९०.२

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:90» मन्त्र:2 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:13» मन्त्र:2 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:2


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

राधसां प्रथमः दाता

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! (त्वम्) = आप (राधसाम्) = ऐश्वर्यों के (प्रथमः दाता असि) = सर्वमुख्य दाता हैं। आप (सत्यः असि) = सत्यस्वरूप हैं। (ईशानकृत्) = स्तोताओं को ऐश्वर्यों का ईशान [स्वामी] बनाने - वाले हैं। [२] (तुविद्युम्नस्य) = महान् ज्ञान ज्योतिवाले (शवसः पुत्रस्य) = बल के पुत्र - सर्वशक्तिमान् (महः) = महान् आपके (युज्या) = योग्य-संगतिकरण योग्य धनों को (आवृणीमहे) = हमें वरते हैं। हम प्रभु से देव धनों को ही प्राप्त करने की कामना करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु ही सर्वमुख्य ऐश्वर्यों के दाता हैं। उस महान् ज्ञानज्योतिवाले सर्वशक्तिमान् प्रभु के धनों का ही हम वरण करते हैं।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - You are the original giver of means of effort and success in all fields of life. You are the maker of leaders and giver of the wealth and honours of life. Of such great lord of glory and power, promoter and protector of strength and power, we pray for wealth, honour and excellence worthy of your glory.