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देवता: इन्द्र: ऋषि: नोधा छन्द: बृहती स्वर: मध्यमः

न त्वा॑ बृ॒हन्तो॒ अद्र॑यो॒ वर॑न्त इन्द्र वी॒ळव॑: । यद्दित्स॑सि स्तुव॒ते माव॑ते॒ वसु॒ नकि॒ष्टदा मि॑नाति ते ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

na tvā bṛhanto adrayo varanta indra vīḻavaḥ | yad ditsasi stuvate māvate vasu nakiṣ ṭad ā mināti te ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

न । त्वा॒ । बृ॒हन्तः॑ । अद्र॑यः । वर॑न्ते । इ॒न्द्र॒ । वी॒ळवः॑ । यत् । दित्स॑सि । स्तु॒व॒ते । माऽव॑ते । वसु॑ । नकिः॑ । तत् । आ । मि॒ना॒ति॒ । ते॒ ॥ ८.८८.३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:88» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:11» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:3


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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

प्रभु की [अजेय्य] शक्ति

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (त्वा) = आपको (बृहन्तः) = बड़े विशाल (वीडवः) = दृढ़ भी (अद्रयः) = पर्वत (न वरन्त) = रोक नहीं सकते। महान् से महान् भी पर्वत आपके मार्ग में विघ्नरूप नहीं हो सकते। [२] (यत्) = जब आप (स्तुवते) = स्तुति करनेवाले (मा-वते) = [मा-मापना- ज्ञान प्राप्त करना] ज्ञान को प्राप्त करनेवाले के लिये वसु (दित्ससि) = धन को देने की कामनावाले होते हैं, तो ते आपके (तत्) = उस धन को (नकिः आमिनाति) = कोई भी हिंसित नहीं कर पाता।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु के मार्ग में कोई विघ्न नहीं कर पाता। प्रभु स्तोता ज्ञानी के लिये जो धन देना चाहते हैं, उसे कोई हिंसित नहीं कर पाता ।
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Not the mighty fixed mountains can restrain you, Indra, generous lord, when you come to give wealth to a celebrant like me. No one can stop and frustrate your will.