वांछित मन्त्र चुनें

यु॒वं हि ष्मा॑ पुरुभुजे॒ममे॑ध॒तुं वि॑ष्णा॒प्वे॑ द॒दथु॒र्वस्य॑इष्टये । ता वां॒ विश्व॑को हवते तनूकृ॒थे मा नो॒ वि यौ॑ष्टं स॒ख्या मु॒मोच॑तम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yuvaṁ hi ṣmā purubhujemam edhatuṁ viṣṇāpve dadathur vasyaïṣṭaye | tā vāṁ viśvako havate tanūkṛthe mā no vi yauṣṭaṁ sakhyā mumocatam ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यु॒वम् । हि । स्म॒ । पु॒रु॒ऽभु॒जा॒ । इ॒मम् । ए॒ध॒तुम् । वि॒ष्णा॒प्वे॑ । द॒दथुः॑ । वस्यः॑ऽइष्टये । ता । वा॒म् । विश्व॑कः । ह॒व॒ते॒ । त॒नू॒ऽकृ॒थे । मा । नः॒ । वि । यौ॒ष्ट॒म् । स॒ख्या । मु॒मोच॑तम् ॥ ८.८६.३

ऋग्वेद » मण्डल:8» सूक्त:86» मन्त्र:3 | अष्टक:6» अध्याय:6» वर्ग:9» मन्त्र:3 | मण्डल:8» अनुवाक:9» मन्त्र:3


0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

पुरुभुजा [अश्विना]

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्राणापानो! (युवम्) = आप दोनों (हि ष्मा) = निश्चय से (पुरुभुजा) = खूब ही पालन करनेवाले हो आप (विष्णाप्वे) = [विष्णुं कर्मणा व्याप्नोति] यज्ञादि कर्मों के द्वारा प्रभु को प्राप्त करनेवाले इस के लिए (एधतुम्) = वृद्धि के साधनभूत धन आदि को (ददधुः) = देते हो। आप (वस्य:) = प्रशस्त वसुओं के द्वारा (इष्टये) = इष्ट प्राप्ति के लिये होते हो। [२] (ता वाम्) = उन आप दोनों को (विश्वक:) = यह अपनी पूर्ण उन्नति करनेवाला (विश्वक तनूकृथे) = वासनारूप शत्रुओं को क्षीण करने के लिये हवते पुकारता है। आप (नः) = हमें (मा वि यौष्टम्) = मत छोड़ जाओ। (सख्या) = हमारे साथ अपनी मित्रताओं को मत नष्ट करो और आप (मुमोचतम्) = हमें रोगों व वासनारूप शत्रुओं से मुक्त करो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्राणापान ही हमारा पालन कर रहे हैं। ये ही हमारी वृद्धि का कारण होते हैं। ये हमें शत्रुओं से मुक्त करें।
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O givers of good health and nourishment to all living beings, you bring knowledge, awareness and wisdom to the aspiring devotee of omnipresent divinity for the attainment of desired honour and excellence. That’s why the whole world calls on you for the health of body and mind. Ashvins, forsake us not, deprive us not of your friendship.